नई दिल्ली, 07 अप्रैल 2026।
केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने मंगलवार को इस्पात क्षेत्र में नवाचार और औद्योगिक प्रभाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एसआरटीएमआई आर एंड डी कनेक्ट कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस उच्च स्तरीय आयोजन में उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर अनुसंधान और व्यावहारिक उपयोग के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा की।
कार्यशाला में विभिन्न सरकारी संस्थानों, प्रमुख इस्पात कंपनियों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई। इसमें उद्योग जगत और अकादमिक क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा अनुसंधान आधारित नवाचारों को औद्योगिक स्तर तक पहुंचाने के उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि देश के इस्पात क्षेत्र को पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़ाकर पर्यावरण अनुकूल और चक्रीय अर्थव्यवस्था की दिशा में ले जाना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नवाचार केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर व्यावहारिक परिणामों में परिवर्तित होना चाहिए, जिससे उद्योग को दीर्घकालिक मजबूती मिल सके।
इस दौरान मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस्पात उद्योग की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर चुनौतियों के बावजूद भारत का इस्पात क्षेत्र तेजी से उभर रहा है और नवाचार के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
कार्यशाला में स्टार्टअप्स के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें तकनीकी दक्षता, डिजिटलीकरण और संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़े नवाचार प्रस्तुत किए गए। इसके साथ ही प्रमुख इस्पात कंपनियों ने उद्योग की जरूरतों के अनुरूप शोध के लिए प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान भी की।
कार्यक्रम के दौरान तकनीकी प्रस्तुतियों, पोस्टर सत्र और विचार-विमर्श के माध्यम से ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया गया। इसमें छात्रों, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों ने अपने-अपने नवाचार साझा किए, जिससे सहयोगात्मक विकास की दिशा में नई संभावनाएं खुलीं।
इस आयोजन में 180 से अधिक हितधारकों की भागीदारी रही, जिसने इसे एक महत्वपूर्ण मंच बना दिया। कार्यशाला का उद्देश्य अनुसंधान और उद्योग के बीच की दूरी को कम करना और भारत को तकनीक आधारित वैश्विक इस्पात शक्ति के रूप में स्थापित करना रहा।













