काबुल, 10 जून।
पड़ोसी देश पाकिस्तान की सेना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का उल्लंघन करते हुए अफगानिस्तान के तीन सीमावर्ती प्रांतों पर भीषण हवाई हमले किए हैं। इस बर्बर सैन्य कार्रवाई में 11 मासूम बच्चों सहित कम से कम 13 नागरिकों की मलबे में दबने से दर्दनाक मौत हो गई। अफगानिस्तान के शीर्ष सरकारी अधिकारियों ने बुधवार को इस खूनी झड़प की आधिकारिक पुष्टि की है। दोनों देशों के मध्य बीते कुछ समय से जारी शांति के दौर के बाद पिछले कुछ सप्ताह के भीतर यह अब तक का सबसे घातक और विनाशकारी हमला माना जा रहा है।
अफगान सरकार के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया हैंडल पर इस सैन्य आक्रामकता की कड़ी निंदा करते हुए लिखा कि बीती रात पाकिस्तानी सेना के लड़ाकू विमानों ने एक बार फिर अफगान हवाई क्षेत्र का अतिक्रमण किया। उन्होंने कुनार, खोस्त और पक्तिका जैसे संवेदनशील सीमावर्ती प्रांतों में बने रिहायशी इलाकों और आम नागरिकों के मकानों पर अंधाधुंध बमबारी की। इस अमानवीय हवाई हमले की चपेट में आने से 11 मासूम बच्चों, एक बेबस महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
यह ताजा हमला दोनों देशों के मध्य जारी गतिरोध में बेहद गंभीर मोड़ लेकर आया है, क्योंकि फरवरी महीने के अंत में शुरू हुए भीषण सीमा विवाद के बाद पिछले कुछ समय से सीमा पर अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण माहौल बना हुआ था। इससे पहले भी पाकिस्तानी वायुसेना ने फरवरी के अंतिम दिनों से लेकर मार्च के मध्य तक अफगान क्षेत्रों को निशाना बनाते हुए कई हवाई हमले किए थे। उस दौर में दोनों मुल्कों के बीच कड़वाहट और तनाव इस चरम पर पहुंच गया था कि पाकिस्तान ने इसे सीधे तौर पर खुली जंग का नाम दे दिया था। मार्च के मध्य में, विशेषकर 16 मार्च के दिन काबुल और कंधार जैसे बड़े शहरों पर अप्रत्याशित और भीषण हमले किए गए थे, जिसके बाद बिगड़ते हालातों को संभालने के लिए अप्रैल महीने में दोनों देशों के बीच एक अस्थायी शांति समझौता हुआ था।
वैश्विक संस्था संयुक्त राष्ट्र की पिछले महीने जारी हुई एक रिपोर्ट के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस खूनी संघर्ष की भयावह तस्वीर साफ नजर आती है। इस रिपोर्ट के अनुसार, साल के शुरुआती तीन महीनों में ही इस सीमावर्ती युद्ध के कारण कम से कम 372 अफगान नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी, जबकि 397 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 में तालिबान के दोबारा सत्ता की बागडोर संभालने के बाद से ही पाकिस्तान और अफगानिस्तान के राजनयिक तथा सीमाई संबंध लगातार बेहद तनावपूर्ण और नाजुक दौर से गुजर रहे हैं।














