कानपुर, 13 जून।
कानपुर में क्रिप्टो निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक सेवानिवृत्त अधिकारी को भारी मुनाफे का लालच देकर 2.52 करोड़ रुपये की ठगी की थी। मामले में अब तक चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
पुलिस के अनुसार पीड़ित को जुलाई 2025 में एक अज्ञात नंबर से संदेश प्राप्त हुआ था। बातचीत शुरू होने के बाद दूसरी ओर मौजूद महिला ने खुद को निवेश क्षेत्र की जानकार बताते हुए क्रिप्टो करेंसी में निवेश से बड़े लाभ का दावा किया। धीरे-धीरे उसने सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से पीड़ित का विश्वास जीत लिया।
जांच में सामने आया कि महिला ने एक निवेश एप डाउनलोड कराकर शुरुआत में सीमित राशि निवेश करने के लिए प्रेरित किया। कुछ समय बाद निवेश की गई रकम का एक हिस्सा वापस भेजा गया, जिससे पीड़ित का भरोसा और बढ़ गया। इसके बाद अधिक लाभ और विशेष बोनस का लालच देकर लगातार बड़ी धनराशि निवेश कराई गई।
पुलिस का कहना है कि पीड़ित ने अधिक मुनाफे की उम्मीद में अपनी बचत, शेयरों की बिक्री, रिश्तेदारों से उधार और संपत्ति पर ऋण लेकर करोड़ों रुपये निवेश कर दिए। जब धनराशि निकालने का प्रयास किया गया तो विभिन्न शुल्कों, करों और जांच प्रक्रियाओं के नाम पर अतिरिक्त रकम जमा कराई जाती रही।
बाद में संदेह होने पर पता चला कि पूरा निवेश प्लेटफॉर्म और उससे जुड़ा नेटवर्क फर्जी था। इसके बाद मामले की शिकायत दर्ज कराई गई, जिस पर साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी और वित्तीय जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, चैट रिकॉर्ड, आईपी लॉग और डिजिटल लेनदेन का विश्लेषण किया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में भेजने के बाद उसे क्रिप्टो करेंसी में परिवर्तित करने का प्रयास किया गया।
डीसीपी क्राइम एस.के. सिंह ने बताया कि जांच के दौरान बिजनौर निवासी विपिन कुमार के बैंक खाते में ठगी की रकम में से 45 लाख रुपये पहुंचने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने उसकी पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह साइबर ठगी से प्राप्त रकम को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से आगे भेजने का काम करता था। जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि गिरोह सोशल मीडिया, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और फर्जी निवेश मंचों के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाता था।
पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है और मामले में आगे की जांच जारी है।














