नई दिल्ली, 13 जून।
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने विभिन्न विभागों की तैयारियों और प्रवर्तन उपायों की समीक्षा करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने वाहन प्रदूषण, सड़कों से उड़ने वाली धूल, निर्माण गतिविधियों, औद्योगिक उत्सर्जन और पराली प्रबंधन जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।
आयोग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता राजेश वर्मा ने की। बैठक में दिल्ली, एनसीआर राज्यों और पंजाब के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों और उनकी प्रगति का आकलन किया गया।
बैठक में निर्देश दिए गए कि 1 अक्टूबर 2026 से एनसीआर के सभी पेट्रोल पंपों और सीएनजी स्टेशनों पर एएनपीआर कैमरों के माध्यम से बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन उपलब्ध न कराया जाए। इसके साथ ही पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के विरुद्ध चल रही कार्रवाई की भी समीक्षा की गई।
आयोग ने वर्ष के अंत तक क्षेत्र से डीजल ऑटो रिक्शा हटाने की दिशा में हो रही प्रगति का आकलन किया। साथ ही प्रमुख चौराहों पर बेहतर यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि जाम की स्थिति कम हो और वाहनों से होने वाला उत्सर्जन घटाया जा सके।
बैठक में निर्माण एवं ध्वस्तीकरण कचरे के वैज्ञानिक निपटान तथा धूल नियंत्रण उपायों पर भी जोर दिया गया। आयोग ने सर्दियों के मौसम से पहले अतिरिक्त मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की तैनाती सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई।
पराली प्रबंधन की समीक्षा के दौरान पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को प्रभावी कार्ययोजनाओं पर तेजी से अमल करने के निर्देश दिए गए। साथ ही ईंट भट्टों में बायोमास आधारित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने और खुले में पराली जलाने की घटनाओं को समाप्त करने पर बल दिया गया।
आयोग ने औद्योगिक इकाइयों को भी निर्धारित उत्सर्जन मानकों का पालन करने की चेतावनी दी। तय समयसीमा के भीतर मानकों का अनुपालन नहीं करने वाले उद्योगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई, यहां तक कि इकाइयों को बंद करने जैसे कदम उठाने की बात कही गई।













