एवियन, 19 जून।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से खास तौर पर ज़िम्मेदारी और समझदारी बरतने की अपील की है। एक टीवी साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे गाज़ा, वेस्ट बैंक और दक्षिणी लेबनान के मोर्चों पर इज़राइल की मौजूदा नीतियों के बिल्कुल खिलाफ हैं। मैक्रों ने वेस्ट बैंक क्षेत्र में नई बस्तियों के निर्माण सहित अन्य सैन्य कार्रवाइयों को पूरी तरह से अनुचित और अस्वीकार्य ठहराया।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति का मानना है कि इस प्रकार की विवादास्पद नीतियां मध्य पूर्व क्षेत्र में आक्रोश और व्यापक हिंसा को जन्म दे रही हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर जारी शांति प्रयास बेहद कमजोर पड़ रहे हैं। वैश्विक राजनीति के इस घटनाक्रम के बीच उन्होंने बताया कि अमेरिका और ईरान के मध्य हुआ हालिया समझौता जी-7 शिखर सम्मेलन के आखिरी दौर में तय किया गया था। उन्होंने इन दावों को सिरे से खारिज किया कि यह समझौता किसी भी तरह से ईरान के आत्मसमर्पण को दर्शाता है।
मैक्रों के अनुसार, ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी हद तक सीमित किया गया है, लेकिन आने वाले 60 दिनों की वार्ताओं में अन्य अहम मुद्दों पर गंभीर विमर्श की जरूरत होगी। उन्होंने घोषणा की कि फ्रांस और ब्रिटेन संयुक्त रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित और पूरी तरह खुला रखने के लिए सहयोग देने को तैयार हैं। पेरिस प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी भावी बातचीत का हिस्सा बनने और लेबनान की आधिकारिक सेना को देश के विविध हिस्सों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद देने के लिए भी तत्पर है।
दूसरी तरफ, रूस और यूक्रेन के बीच जारी सैन्य संघर्ष को लेकर फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने यूक्रेन के कड़े प्रतिरोध की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यूक्रेन ने अपने अदम्य साहस, अनूठे नवाचार और घरेलू सैन्य उत्पादन के दम पर पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। मैक्रों ने आशा व्यक्त की कि मॉस्को पर दबाव बनाकर उसे वापस शांति वार्ता की मेज़ पर लाया जा सकेगा। इसके साथ ही उन्होंने इस बड़े विवाद को सुलझाने की दिशा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की जा रही पहलों की भी सराहना की।














