संपादकीय
24 Jun, 2026

आग लगने पर ही क्यों जागता है प्रशासन: मध्यप्रदेश के कोचिंग हब बने मौत के लाक्षागृह, लखनऊ हादसे का इंतजार क्यों?

मध्य प्रदेश के कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी हो रही है और प्रशासन किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार कर रहा है।

भोपाल, 24 जून।

लखनऊ के अलीगंज में कोचिंग सेंटर में लगी आग ने चौदह मासूम जिंदगियां लील ली थीं। वह तस्वीरें अभी आंखों से नहीं हटी हैं - धुआं, चीखें, टूटी खिड़कियां और बेसमेंट का बंद रास्ता। यह सब मध्यप्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन जैसे शहरों में भी कभी दोहराया जा सकता है, क्योंकि यहां हजारों कोचिंग सेंटर माचिस की डिब्बी जैसी बहुमंजिला इमारतों में चल रहे हैं। आने-जाने का रास्ता एक, सीढ़ियां संकरी और सुरक्षा के नाम पर केवल औपचारिकताएं। प्रशासन तब जागता है जब आग लग जाती है। तब जांच होती है, तब नोटिस निकलते हैं, लेकिन आग लगने से पहले कोई नहीं जागता। यह लापरवाही अब आदत बन चुकी है और इसकी कीमत हमारे बच्चे चुका रहे हैं।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एमपी नगर सबसे बड़ा कोचिंग हब है। यहां डेढ़ सौ से अधिक बड़े कोचिंग सेंटर, चार सौ से अधिक मध्यम स्तर के सेंटर और एक हजार से अधिक छोटे ट्यूशन क्लास संचालित हो रहे हैं। रोज हजारों छात्र इन इमारतों में घंटों बैठते हैं। अधिकांश सेंटर बेसमेंट में चल रहे हैं। बेसमेंट यानी धरती के नीचे का कमरा, जहां हवा कम, रोशनी कम और निकलने का रास्ता भी सीमित होता है। आग लगने पर धुआं ऊपर जाएगा और बच्चे नीचे फंस जाएंगे। लखनऊ हादसे में भी यही हुआ था। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में भी कमोबेश यही स्थिति है। भवन मानकों में दो निकास द्वार अनिवार्य हैं, लेकिन वास्तविकता में अधिकांश जगह एक ही रास्ता मौजूद है।

अग्निशमन नियम कहते हैं कि हर व्यावसायिक इमारत में फायर एनओसी, फायर एक्सटिंग्विशर, स्प्रिंकलर सिस्टम, आपातकालीन निकास और सुरक्षित विद्युत व्यवस्था अनिवार्य है। लेकिन अधिकांश कोचिंग सेंटरों में यह व्यवस्थाएं केवल कागजों तक सीमित हैं। मॉक ड्रिल औपचारिकता बनकर रह गई है। बच्चों को यह तक नहीं पता कि आपात स्थिति में किस दिशा से बाहर निकलना है। यह स्थिति चिंताजनक ही नहीं, खतरनाक भी है।

प्रशासन की निष्क्रियता सबसे बड़ा सवाल है। हादसों के बाद अभियान चलाए जाते हैं, नोटिस दिए जाते हैं और कुछ दिनों तक कार्रवाई भी होती है, लेकिन फिर सब पहले जैसा हो जाता है। नगर निगम, विकास प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग और शिक्षा विभाग के बीच समन्वय का अभाव है। नतीजा यह है कि हजारों बच्चे रोज जोखिम उठाने को मजबूर हैं।

समाधान कठिन नहीं है। सभी कोचिंग सेंटरों का नियमित फायर ऑडिट हो, फायर एनओसी के बिना संचालन पर रोक लगे, बेसमेंट में कोचिंग पर सख्ती से प्रतिबंध लागू किया जाए, हर भवन में दो सुरक्षित निकास मार्ग अनिवार्य हों और नियमित मॉक ड्रिल कराई जाए। अभिभावकों को भी सतर्क रहना होगा। फीस जमा करने से पहले सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच करना उनकी जिम्मेदारी है।

मध्यप्रदेश शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं का बड़ा केंद्र है। यहां के विद्यार्थी देशभर में सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं। लेकिन यदि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तो यह उपलब्धियां भी अर्थहीन हो जाएंगी। प्रशासन को आग लगने के बाद नहीं, उससे पहले जागना होगा। क्योंकि हादसे के बाद केवल राख बचती है, और राख से भविष्य नहीं बनता।

|
आज का राशिफल

आपके पूंजीगत निवेशों से भी लाभ होगा। पारिवारिक उत्तरदायित्व अधिक रहेंगे। पदोन्नति मिलने का योग है। आमदनी में वृद्घि होगी। यात्रा में सावधानी बरतें। क्षमता से अधिक कार्य करने से मर्ज बिगड़ सकता है। मनचाहा स्थानान्तरण मिल सकता है। अपने लक्ष्य के प्रति सजग रहें। शुभांक-2-5-6

आज का मौसम

भोपाल

24° / 34°

Heavy thunderstorm

ट्रेंडिंग न्यूज़