कोलकाता, 24 जून।
पश्चिम बंगाल सरकार ने आम जनता पर करों का अतिरिक्त बोझ डाले बिना राज्य के राजस्व में भारी बढ़ोतरी करने की एक महत्वाकांक्षी रणनीति अपनाई है। सरकार का मुख्य ध्यान कर संग्रह प्रणाली में मौजूद खामियों को दूर करने और राजस्व रिसाव को पूरी तरह रोकने पर है। इसके लिए विशेष रूप से पत्थर खदानों और बालू खनन के क्षेत्र में जारी अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने की तैयारी की जा रही है।
राज्य सरकार ने विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक चालान प्रणाली में होने वाले कथित फर्जीवाड़े को लक्षित किया है। पूर्ववर्ती शासनकाल में खनन से जुड़े व्यापार में कर चोरी की जो शिकायतें सामने आई थीं, अब उन्हें रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। वित्त विभाग उन सरकारी कर्मचारियों की पहचान कर रहा है जो चालान प्रक्रिया में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार थे। उनके स्थान पर अब पारदर्शी और ईमानदार छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में आंकड़ों के माध्यम से इस बदलाव का प्रमाण भी दिया। उन्होंने बताया कि बीरभूम की पत्थर खदानों से जो राजस्व पहले औसतन 60 करोड़ रुपये रहता था, वह नई व्यवस्था के लागू होने के कुछ ही समय में बढ़कर 83 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार का मानना है कि करों की दरें बढ़ाए बिना भी केवल व्यवस्था को दुरुस्त करके सरकारी खजाने को भरा जा सकता है।
इस दिशा में एक और बड़ा कदम 'सिंगल विंडो' व्यवस्था है, जिसकी घोषणा वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने की है। 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों को अब एक ही खिड़की के माध्यम से मंजूरी मिलेगी। यह न केवल कारोबार सुगमता को बढ़ाएगा, बल्कि अलग-अलग विभागों में फाइलों की मंजूरी के नाम पर होने वाले भ्रष्टाचार को भी खत्म करेगा, जिससे अंततः राज्य के वैध राजस्व में बढ़ोतरी होगी।










