न्यायपालिका
24 Jun, 2026

सर्वोच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय: सिर्फ मध्यस्थता का प्रावधान होने से उपभोक्ता फोरम का अधिकार क्षेत्र खत्म नहीं होता

सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि मध्यस्थता का प्रावधान होने के बावजूद उपभोक्ता फोरम को ही उपभोक्ता शिकायतों का निपटारा करना होगा।

नई दिल्ली, 24 जून।

सर्वोच्च न्यायालय की पीठ, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने टी.के.ए. पद्मनाथन बनाम अभियान कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड की याचिका में उपभोक्ता कानून के दायरे को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। पीठ ने स्पष्ट किया कि सिर्फ इसलिए कि किसी समझौते में मध्यस्थता का प्रावधान मौजूद है, उपभोक्ता फोरम का अधिकार क्षेत्र खत्म नहीं हो जाता। एक बार यदि जिला उपभोक्ता फोरम शिकायत स्वीकार कर लेता है, तो उसे कानून में बताए गए तरीके से ही आगे कार्रवाई करनी होगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 12(4) का हवाला देते हुए कहा:

"एक बार जब शिकायत स्वीकार कर ली जाती है और उस पर आगे कार्रवाई की अनुमति मिल जाती है, तो फोरम को उस पर कानून के तहत बताए गए तरीके से ही कार्रवाई करनी होती है। धारा 12(4) के प्रावधान में कानून के तहत एक स्पष्ट रोक लगाई गई है। इसमें कहा गया है कि अगर जिला फोरम ने कोई शिकायत स्वीकार की है, तो उसे किसी दूसरी अदालत, ट्रिब्यूनल या अथॉरिटी को ट्रांसफर नहीं किया जाएगा, जिसे किसी दूसरे लागू कानून के तहत बनाया गया हो।"

यानी शिकायत स्वीकार होने के बाद फोरम यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकता कि मामला आर्बिट्रेशन में जाना चाहिए। उसे गुण-दोष के आधार पर फैसला देना ही होगा।

यह विवाद टी.के.ए. पद्मनाथन और अभियान कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड के बीच का था। शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दायर की थी। सोसाइटी ने तर्क दिया कि दोनों पक्षों के बीच हुए करार में मध्यस्थता क्लॉज है, इसलिए उपभोक्ता फोरम को सुनवाई का अधिकार नहीं है और मामला आर्बिट्रेटर के पास भेजा जाए।

जिला फोरम ने शिकायत स्वीकार करने के बाद भी उसे मध्यस्थता के लिए भेज दिया। राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग ने भी इस फैसले को सही माना।

सुप्रीम कोर्ट ने निचली फोरमों के इस रुख को गलत ठहराया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम एक विशेष कानून है, जो उपभोक्ताओं को त्वरित और सस्ता न्याय देने के लिए बनाया गया है। मध्यस्थता अधिनियम, 1996 की धारा 8 के बावजूद, यदि उपभोक्ता फोरम शिकायत को सुनने योग्य पाता है और उसे स्वीकार कर लेता है, तो वह बाध्य है कि कानून के तहत फैसला दे।

सर्वोच्च न्यायालय ने अपील मंजूर कर ली। जिला फोरम के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें शिकायत को मध्यस्थता के लिए भेजा गया था। कोर्ट ने जिला फोरम को निर्देश दिया कि वह विवाद के गुण-दोष के आधार पर फैसला करे और, यदि संभव हो, तो एक वर्ष के भीतर ऐसा करे।

इस फैसले का प्रभाव:
  • उपभोक्ताओं को राहत: बिल्डर, सोसाइटी या कंपनियां अब करार में आर्बिट्रेशन क्लॉज डालकर उपभोक्ता फोरम से नहीं बच सकेंगी।

  • फोरम की जवाबदेही तय: एक बार शिकायत स्वीकार होने के बाद फोरम को मामले को दूसरी जगह ट्रांसफर करने की बजाय स्वयं उसका निपटारा करना होगा।

  • त्वरित न्याय: मध्यस्थता की लंबी प्रक्रिया में जाने के बजाय उपभोक्ता को फोरम से सीधा और समयबद्ध न्याय मिलेगा।

यह फैसला दोहराता है कि उपभोक्ता कानून का मकसद उपभोक्ता को अतिरिक्त मंच देना है, न कि उसके मौजूदा अधिकार छीनना।

|
आज का राशिफल

आपके पूंजीगत निवेशों से भी लाभ होगा। पारिवारिक उत्तरदायित्व अधिक रहेंगे। पदोन्नति मिलने का योग है। आमदनी में वृद्घि होगी। यात्रा में सावधानी बरतें। क्षमता से अधिक कार्य करने से मर्ज बिगड़ सकता है। मनचाहा स्थानान्तरण मिल सकता है। अपने लक्ष्य के प्रति सजग रहें। शुभांक-2-5-6

आज का मौसम

भोपाल

24° / 34°

Heavy thunderstorm

ट्रेंडिंग न्यूज़