रांची, 24 जून।
राजधानी स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में मेडिकल की सीटों के आवंटन और नामांकन में हुई धांधली की जांच अब तेज हो गई है। अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) की एक टीम ने बुधवार को संस्थान के डीन कार्यालय में दबिश दी और दाखिला प्रक्रिया से जुड़े तमाम दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया।
जांच एजेंसी मुख्य रूप से पिछले शैक्षणिक सत्र में हुए दाखिलों की बारीकी से पड़ताल कर रही है। टीम यह खंगाल रही है कि काउंसलिंग और सीट आवंटन के दौरान नियमों का पालन हुआ या फिर नियमों को ताक पर रखकर अयोग्य अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया गया। इस दौरान प्रशासनिक फाइलों और संबंधित रिकॉर्ड का भी अवलोकन किया गया।
पिछले सत्र में हुई दाखिला प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। इनमें प्रवेश में पक्षपात, दस्तावेजों के सत्यापन में बड़ी लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप शामिल हैं। इन्हीं शिकायतों को आधार बनाकर राज्य सरकार ने पूरे मामले की विस्तृत जांच का जिम्मा सीआईडी को सौंपा था।
टीम ने रिम्स के विभिन्न विभागों से जरूरी दस्तावेज जुटाए हैं और कई अधिकारियों व कर्मचारियों से पूछताछ की है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि इस पूरी प्रक्रिया में कहीं कोई बड़ा घोटाला तो नहीं हुआ है।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि उन्हें काउंसलिंग में फर्जी दस्तावेज लगाने की शिकायतें मिली थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार पारदर्शिता को लेकर गंभीर है और गड़बड़ी पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सीआईडी का कहना है कि जांच अभी शुरुआती स्तर पर है और दस्तावेजों के मिलान के बाद आगे की रणनीति तय होगी। रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में शामिल लोगों पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।











