मुंबई, 24 जून।
महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर द्वारा मराठी पढ़ने में हुई त्रुटियों को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने इस मुद्दे पर हमला बोलते हुए अध्यक्ष को निलंबित करने की मांग की है। राउत का तर्क है कि यदि आम नागरिकों, दुकानदारों और चालकों पर मराठी भाषा को लेकर सख्ती की जाती है, तो संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए अलग मापदंड क्यों हैं।
संजय राउत ने आरोप लगाया कि विधानसभा में शोक प्रस्ताव पढ़ते समय नार्वेकर ने चंद मिनटों में ही 40 से अधिक गलतियां कीं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अध्यक्ष को उनके नाम के आधार पर 'नार्वे का निवासी' कहा जा सकता है, इसलिए मानकों के अनुरूप उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। इस विवाद में पूर्व महापौर किशोरी पेडणेकर भी कूद पड़ी हैं, जिन्होंने इसे आत्मचिंतन का विषय बताया है।
विवाद बढ़ता देख राहुल नार्वेकर ने बुधवार को विधानसभा में अपना पक्ष रखा और खेद व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शोक प्रस्ताव अत्यंत बारीक अक्षरों में लिखे गए थे, जिसके कारण अनजाने में त्रुटियां हुईं। उन्होंने मराठी भाषा और संस्कृति के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए कहा कि भविष्य में वे ऐसी गलतियों से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतेंगे।
यह मामला अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्ष इसे मराठी अस्मिता और भाषा सम्मान से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश में है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और गरमा सकता है, हालांकि अध्यक्ष द्वारा माफी मांगे जाने के बाद स्थिति को संभालने का प्रयास किया गया है।











