कोलकाता, 30 जून।
तृणमूल कांग्रेस के लिए कानूनी मोर्चे पर मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पार्टी के बैंक खाते को फ्रीज किए जाने के मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने त्वरित सुनवाई की मांग वाली अर्जी को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि इस प्रकरण की सुनवाई नियत केस सूची के अनुसार ही की जाएगी।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन सर्वोपरि है। अदालत ने विशेष प्राथमिकता देकर तत्काल सुनवाई करने की अर्जी को यह कहते हुए नकार दिया कि इसके लिए कोई ठोस कानूनी आधार नहीं बनता है। इस निर्णय से पार्टी के कालीघाट खेमे को बड़ा झटका लगा है।
पार्टी के भीतर मचे आंतरिक घमासान के कारण यह विवाद उपजा है। एक धड़ा ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में खुद को असली तृणमूल बता रहा है, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी समर्थक खेमा भी अपनी दावेदारी जता रहा है। संगठन पर नियंत्रण पाने की इस खींचतान के बीच पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने बैंक खातों को फ्रीज कराने के लिए कानूनी कदम उठाए थे।
दोनों गुटों के बीच जारी इस टकराव ने पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ा दी है। बैंक खाते सील होने के बाद पार्टी की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। फिलहाल कोर्ट से कोई राहत न मिलने के बाद अब संगठन को अपनी बारी का इंतजार करना होगा।











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