देहरादून, 01 जुलाई।
उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए बुधवार से अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम को प्रभावी कर दिया गया है। इसके लागू होते ही राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड और उससे संबंधित पुराने नियम समाप्त हो गए हैं। अब सूबे के 452 मदरसों समेत तमाम अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को नई नियमावली के तहत ही मान्यता प्राप्त करनी होगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कदम को आधुनिक और पारदर्शी शिक्षा की दिशा में अहम बताया है। सरकार का मुख्य लक्ष्य इन संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है। इसके जरिए बच्चों को आधुनिक विज्ञान, तकनीक और भारतीय जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
नई व्यवस्था के अंतर्गत पंजीकृत मदरसों को अब पहले उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेनी होगी। इसके बाद ही उन्हें अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता मिलेगी। यह मान्यता तीन शैक्षणिक वर्षों के लिए प्रभावी होगी।
प्राधिकरण के पास संस्थानों के निरीक्षण और नियमों के उल्लंघन पर मान्यता रद्द करने के भी अधिकार होंगे। यह नियम राज्य के सभी धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों—मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी—के संस्थानों पर एक समान लागू होगा।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अनुसार, प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में पहले चरण में नौ संस्थानों को नई व्यवस्था के तहत मान्यता प्रमाण पत्र वितरित किए गए, जिसमें सात मदरसे, एक जैन और एक सिख संस्थान शामिल हैं।



















