वाराणसी, 1 जुलाई।
वाराणसी (काशी) में इन दिनों अस्सी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में एक अनूठी धार्मिक परंपरा देखने को मिल रही है। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर स्नान के बाद 'बीमार' हुए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और बहन सुभद्रा के स्वस्थ होने की कामना की जा रही है। पुजारी राधेश्याम पांडेय के अनुसार, भगवान को स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष रूप से तैयार औषधीय काढ़े का भोग लगाया जा रहा है। काली मिर्च, लौंग, इलायची, जायफल और तुलसी से निर्मित यह काढ़ा पारंपरिक मिट्टी के चूल्हे पर तैयार किया जाता है।
श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान को अर्पित यह 'औषधीय प्रसाद' ग्रहण करने से सर्दी, खांसी और पेट संबंधी बीमारियां दूर होती हैं। मंदिर में इस प्रसाद को पाने के लिए भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ता रामयश मिश्र ने इस अनुष्ठान के पीछे के गहरे संदेश को साझा करते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने का दर्शन है। उन्होंने बताया कि भगवान का बीमार होना सृष्टि को यह संदेश देता है कि सुख-दुख और रोग जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं, जिनका सामना धैर्य से करना चाहिए। साथ ही, यह प्रकृति के संसाधनों के सीमित उपयोग और पर्यावरण संतुलन का भी संदेश देता है।



















