कोलकाता, 03 जुलाई।
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्तावित विधेयक के मसौदे को मंजूरी प्रदान कर दी गई है।
अब यह ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति को भेजा जाएगा। यह समिति चार सप्ताह में इसका परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद अगस्त में इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के आदिवासी, कुर्मी और अन्य प्राचीन जनजातीय समुदायों को इस यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है। यह निर्णय उत्तराखंड और गुजरात के मॉडल को ध्यान में रखकर लिया गया है।
इस कानून का मुख्य उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति जैसे नागरिक मामलों में धर्म आधारित कानूनों को हटाकर एक समान व्यवस्था स्थापित करना है। इससे नागरिकों को एक समान अधिकार मिल सकेंगे।
मंत्रिमंडल की बैठक में सरकारी खर्चों पर नियंत्रण और राजस्व लीकेज रोकने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। विशेषकर पत्थर और बालू खनन क्षेत्रों में कर वसूली बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए सुरक्षा बलों को भूमि हस्तांतरण के प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी है। इसका उपयोग बाड़ लगाने और सड़क निर्माण के लिए होगा।
न्यायिक तंत्र को दुरुस्त करने के लिए राज्य के नौ जिलों में नए त्वरित न्यायालय स्थापित किए जाएंगे। इन अदालतों के लिए 35 नए पदों का सृजन भी किया गया है।



















