रायपुर, 3 जुलाई।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का ग्रेच्युटी पर पूरा अधिकार है। कोर्ट ने साफ कहा कि इन कर्मचारियों की सेवा अवधि को ग्रेच्युटी गणना में शामिल करना अनिवार्य है।
जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने जल संसाधन विभाग से जुड़ी राज्य सरकार की 9 याचिकाओं को एक साथ खारिज कर दिया। ये मामला सदानंद मानिकपुरी, बाबूलाल साहू और अन्य से जुड़ा था, जिन्होंने वर्षों तक विभाग में सेवाएं दी थीं।
कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ढाई दशक तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को अपने हक के लिए अदालतों की दौड़ लगाना विडंबना है। पूर्व में सक्षम प्राधिकारियों ने इन कर्मचारियों के पक्ष में भुगतान का आदेश दिया था, जिसे सरकार ने चुनौती दी थी।
राज्य की ओर से दलील दी गई कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए सुनवाई टाल दी जाए। हालांकि, कर्मचारियों के वकील ने वर्ष 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए इसे न्याय के विरुद्ध बताया।
अदालत ने कहा कि जब तक कोई बड़ी बेंच पुराना फैसला नहीं बदलती, तब तक मौजूदा कानून ही प्रभावी रहेगा। किसी मामले को महज इसलिए अनिश्चितकाल के लिए नहीं टाला जा सकता क्योंकि उसका संदर्भ बड़ी बेंच के पास है।
अंत में न्यायालय ने आदेश दिया कि 22-25 साल तक निरंतर कार्य करने वाले कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का लाभ मिलना चाहिए। इस फैसले से उन सभी कर्मियों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें पहले नियमितीकरण के बाद भी ग्रेच्युटी से वंचित रखा गया था।


















