नई दिल्ली, 4 जुलाई।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में भोजन केवल पेट भरने का माध्यम बनकर रह गया है। थाली सामने होती है, लेकिन ध्यान मोबाइल, टीवी या काम की चिंताओं में उलझा रहता है। यही आदत माइंडलेस ईटिंग कहलाती है, जो मोटापा, मधुमेह, अपच, गैस और हृदय रोग जैसी समस्याओं की बड़ी वजह बन रही है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार भारत में हर चौथा व्यक्ति अधिक वजन का शिकार है। शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 35 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि तृप्ति का संकेत मस्तिष्क तक पहुंचने में लगभग 20 मिनट लगते हैं, जबकि अधिकांश लोग कुछ ही मिनटों में भोजन खत्म कर देते हैं। परिणामस्वरूप शरीर की जरूरत से अधिक कैलोरी ग्रहण हो जाती है और धीरे-धीरे वजन बढ़ने लगता है।
माइंडफुल ईटिंग किसी विशेष डाइट का नाम नहीं, बल्कि पूरे ध्यान और संतुलन के साथ भोजन करने की आदत है। हर कौर को अच्छी तरह चबाएं, भोजन के स्वाद, सुगंध और बनावट को महसूस करें। खाते समय मोबाइल और टीवी से दूरी रखें और बीच-बीच में खुद से पूछें कि क्या वास्तव में अभी भी भूख है।
इस सरल आदत से कैलोरी का सेवन कम होता है, पाचन बेहतर रहता है और मानसिक तनाव भी घटता है। भोजन शुरू करने से पहले दो गहरी सांस लें, थाली में उतना ही परोसें जितना खाना हो और पेट लगभग 80 प्रतिशत भरने पर रुक जाएं। यदि दोबारा भूख लगे तो कुछ मिनट रुककर पानी पिएं, फिर निर्णय लें।
अधिक खाना पेट की नहीं, मन की आदत है। जब हम भोजन को केवल स्वाद नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का आधार मानेंगे, तब शरीर भी स्वस्थ रहेगा और मन भी संतुष्ट होगा। इसलिए आज से संकल्प लें कि हर कौर पूरी सजगता के साथ खाएंगे, क्योंकि अच्छी सेहत की शुरुआत सही खानपान और स्वयं की सुनने की आदत से होती है।














