नई दिल्ली, 4 जुलाई।
खगोलीय घटनाओं का सिलसिला इस जुलाई में आसमान के शौकीनों को रोमांचित करने वाला है। 11 जुलाई को अर्धचंद्र, मंगल और प्लीएडीज़ (कृत्तिका) तारापुंज के मिलन से आकाश में एक दुर्लभ त्रिभुजाकार आकृति बनने जा रही है। यह घटना सूर्योदय से लगभग दो घंटे पहले पूर्व दिशा में नजर आएगी। चमकीले तारों के समूह प्लीएडीज़ के साथ लाल रंग का मंगल और चांद की पतली सुनहरी फांक मिलकर एक सुंदर त्रिकोण बनाएंगे। यह नजारा नंगी आंखों से साफ देखा जा सकेगा, जबकि दूरबीन से यह और अधिक स्पष्ट व सुंदर दिखाई देगा।
प्लीएडीज़ को कृत्तिका तारागुच्छ भी कहा जाता है। यह पृथ्वी के सबसे निकट और सबसे चमकीले तारों के समूहों में से एक है। भारतीय खगोल विज्ञान में इसे कृत्तिका नक्षत्र के रूप में जाना जाता है। यह वृषभ तारामंडल में स्थित है और इसमें सैकड़ों तारे हैं, हालांकि नंगी आंखों से केवल छह या सात तारे ही दिखाई देते हैं। प्राचीन काल से यह तारागुच्छ दिशासूचक और कृषि कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।
11 जुलाई को चंद्रमा अपनी अर्धचंद्र अवस्था में होगा और मंगल ग्रह के साथ प्लीएडीज़ के बीच से गुजरेगा। इस दौरान तीनों मिलकर आकाश में समबाहु त्रिभुज जैसी आकृति बनाएंगे। मंगल का लाल रंग, चंद्रमा की सफेद आभा और प्लीएडीज़ का नीला-सफेद प्रकाश मिलकर अद्भुत रंग-संयोजन प्रस्तुत करेंगे। खगोलविदों के अनुसार यह दृश्य लगभग दो घंटे तक दिखाई देगा और पूर्व दिशा में क्षितिज से करीब 20 डिग्री ऊपर रहेगा।
ग्रहों का यह मिलन 11 जुलाई से शुरू होकर 14 जुलाई की सुबह तक प्रभावी रहेगा। 14 जुलाई को चंद्रमा मंगल के और अधिक करीब दिखाई देगा। इसके बाद चंद्रमा आगे बढ़ जाएगा और यह युति समाप्त हो जाएगी। जुलाई के अंतिम सप्ताह में डेल्टा एक्वेरिड्स और अल्फा कैप्रीकॉर्निड्स उल्का वर्षा भी चरम पर होगी। आसमान साफ रहने पर इसे मध्यरात्रि में देखा जा सकेगा। 18 जुलाई को मंगल और प्लीएडीज़ की युति भी देखने योग्य रहेगी। जुलाई के अंतिम दिनों में पूर्णिमा के बाद 29 जुलाई को पश्चिमी दिशा में चंद्रमा का विशेष दृश्य दिखाई देगा। इस पूर्णिमा को बक मून कहा जाता है। यह नाम गर्मियों के दौरान हिरणों के नए सींग निकलने के कारण प्रचलित हुआ।
इस घटना को देखने के लिए किसी महंगे उपकरण की आवश्यकता नहीं है। सुबह लगभग चार बजे उठकर पूर्व दिशा में खुले आसमान के नीचे पहुंचें। शहर की रोशनी और प्रदूषण से दूर स्थान सबसे उपयुक्त रहेगा। मोबाइल एप की सहायता से ग्रहों की सही स्थिति का पता लगाया जा सकता है। यदि आपके पास दूरबीन या टेलीस्कोप है तो प्लीएडीज़ के अलग-अलग तारे, मंगल का लाल रंग और चंद्रमा के गड्ढे भी स्पष्ट दिखाई देंगे। फोटोग्राफी के शौकीन ट्राइपॉड पर कैमरा लगाकर लंबा एक्सपोजर देकर सुंदर चित्र ले सकते हैं।
ग्रहों की युति कोई दुर्लभ घटना नहीं होती, लेकिन हर युति अपने आप में विशेष होती है, क्योंकि ग्रहों की गति अलग-अलग होती है। चंद्रमा प्रतिदिन लगभग 13 डिग्री आगे बढ़ता है, जबकि मंगल अपनी कक्षा में अपेक्षाकृत धीमी गति से चलता है। जब ये तीनों एक साथ दिखाई देते हैं, तो खगोलविदों को ग्रहों की कक्षा, दूरी और गति का अध्ययन करने का अवसर मिलता है। प्राचीन काल में ऐसी घटनाओं के आधार पर कैलेंडर बनाए जाते थे और खेती का समय तय किया जाता था। आज भी ये घटनाएं विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि जगाती हैं।
भारत में प्लीएडीज़ को कृत्तिका कहा गया है और इसे कार्तिकेय की छह माताओं से जोड़ा जाता है। मंगल को सेनापति और चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। इन तीनों का मिलन शुभ संकेत माना जाता है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार जब मंगल और चंद्रमा कृत्तिका के पास आते हैं तो अच्छी वर्षा की संभावना मानी जाती थी और किसान इसे बोवनी का संकेत समझते थे।
यह घटना स्कूलों और कॉलेजों के लिए भी सुनहरा अवसर है। विज्ञान क्लब सुबह के समय अवलोकन कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं। बच्चों को ग्रह, तारे और चंद्रमा की गति प्रत्यक्ष दिखाकर सौरमंडल को बेहतर ढंग से समझाया जा सकता है। इससे किताबी ज्ञान अनुभव में बदलता है और जिज्ञासा बढ़ती है। माता-पिता को भी बच्चों को यह अद्भुत दृश्य अवश्य दिखाना चाहिए।
आसमान देखने के लिए अंधेरी जगह चुनें, लेकिन सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें। किसी सुनसान स्थान पर अकेले न जाएं। मच्छरों से बचाव के लिए पूरे कपड़े पहनें और ठंडी सुबह के कारण हल्के गर्म कपड़े साथ रखें। मोबाइल की टॉर्च का कम से कम उपयोग करें, क्योंकि तेज रोशनी से आंखों की अंधेरे में देखने की क्षमता प्रभावित होती है और तारे धुंधले दिखाई देने लगते हैं।
11 जुलाई की सुबह आसमान एक प्राकृतिक प्रयोगशाला बन जाएगा, जहां ग्रह, चंद्रमा और तारे मिलकर मानो ज्यामिति का पाठ पढ़ाएंगे। यह दृश्य हमें याद दिलाता है कि ब्रह्मांड कितना विशाल और सुव्यवस्थित है। हमारी पृथ्वी उस अनंत आकाश में एक छोटा-सा बिंदु मात्र है। ऐसे अवसर विज्ञान के प्रति प्रेम बढ़ाते हैं और हमें प्रकृति से जोड़ते हैं। इसलिए अलार्म लगाइए और 11 जुलाई की सुबह पूर्व दिशा में नजरें टिकाइए। जब चंद्रमा, मंगल और प्लीएडीज़ मिलकर आकाश में त्रिभुज बनाएंगे, तो वह क्षण आपकी स्मृतियों में हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगा।















