नई दिल्ली, 8 जुलाई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से धैर्य के महत्व पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसका संयम ही है। यही गुण देश को विकट से विकट परिस्थितियों में भी एक सूत्र में बांधे रखता है और प्रगति व आत्मनिर्भरता की राह पर निरंतर आगे बढ़ने का हौसला देता है।
प्रधानमंत्री ने एक प्रेरणादायक सुभाषितम् का उल्लेख करते हुए कहा कि चाहे प्रलय का समय ही क्यों न आ जाए और विशाल पर्वत भी हवा के झोंकों से डगमगा जाएं, लेकिन दृढ़ संकल्पित व्यक्ति का मन कभी विचलित नहीं होता। उन्होंने 'चलन्ति गिरयः...' श्लोक के जरिए समझाया कि संकट के क्षणों में भी संकल्प और स्थिर बुद्धि बनाए रखना अनिवार्य है।
इस श्लोक का सार यही है कि गंभीर से गंभीर संकट के आने पर भी बुद्धिमान और साहसी लोग अपना मार्ग नहीं बदलते। यह सीख हमें याद दिलाती है कि कठिन समय में भी व्यक्ति को अपना मानसिक संतुलन खोने के बजाय सच्चाई के पथ पर अडिग रहना चाहिए।












