सागर, 08 जुलाई।
मध्य प्रदेश के नवगठित वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघों की मौजूदगी को लेकर व्याप्त भ्रम की स्थिति पर वन विभाग ने आधिकारिक तौर पर स्पष्टीकरण जारी किया है। वैज्ञानिक जांच और साक्ष्यों के गहन विश्लेषण के बाद यह पुष्टि हुई है कि रिजर्व के मोहली परिक्षेत्र में एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग बाघ सक्रिय हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हाल ही में हुई हमलों की घटनाओं को एक ही बाघ से जोड़कर देखना गलत है।
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, 5 जुलाई को मोहली परिक्षेत्र में गश्त कर रहे वनकर्मियों पर एक बाघ ने हमला कर दिया था, जिसमें श्रमिक बाबूलाल रैकवार घायल हो गए थे। इसके बाद चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान 7 जुलाई को महावत को एक बाघ शावक दिखाई दिया। 'अखिल भारतीय बाघ गणना-2025' के डेटा और पगमार्क के विश्लेषण से यह सिद्ध हुआ है कि वनकर्मियों पर हमला करने वाला वही शावक था, जिसकी तस्वीरें नवंबर 2025 में कैमरा ट्रैप में दर्ज की गई थीं।
इसके विपरीत, पटना मोहली गांव में एक ग्रामीण पर हुए हमले की घटना अलग बाघ द्वारा अंजाम दी गई थी। तकनीकी टीम ने दोनों घटनाओं में शामिल बाघों के स्ट्राइप पैटर्न (धारियों) का मिलान किया, जिससे उनकी पहचान अलग-अलग होने की पुष्टि हुई।
वन विभाग ने ग्रामीणों से अफवाहों से बचने की अपील की है। रिजर्व प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी है और दोनों बाघों की गतिविधियों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।












