जबलपुर, 14 जुलाई।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने कटनी स्थित सिलिको बाईट शिक्षा उत्कर्ष समिति की ओर से दायर विविध व्यवहार प्रकरण को खारिज कर दिया है। समिति ने आरोप लगाया था कि विवादित भूमि पर उच्च न्यायालय के यथास्थिति आदेश के बावजूद निर्माण कार्य किया गया, लेकिन अदालत ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया।
समिति, जो सिलिको बाईट कटनी डिग्री कॉलेज का संचालन करती है, ने कटनी कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय के पदाधिकारियों सहित पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, तत्कालीन तहसीलदार मुड़वारा और कोतवाली थाना के तत्कालीन प्रभारी के विरुद्ध आवेदन प्रस्तुत किया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि यथास्थिति आदेश के बावजूद विवादित भूमि पर निर्माण कराया गया और संबंधित अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की।
सुनवाई के दौरान कटनी कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय की ओर से न्यायालय को बताया गया कि सिलिको बाईट शिक्षा उत्कर्ष समिति ने पहले जिला न्यायालय में भूमि विक्रय को शून्य घोषित करने की मांग करते हुए दीवानी वाद दायर किया था। जिला न्यायालय से दावा खारिज होने के बाद समिति ने उच्च न्यायालय में अपील की, जहां यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पारित किया गया था।
महाविद्यालय की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि यथास्थिति आदेश का उल्लंघन नहीं हुआ है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विवेक जैन ने कहा कि यथास्थिति का आदेश अपील के साथ दायर स्थगन आवेदन में की गई प्रार्थना के संदर्भ में था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि स्थगन आवेदन में विवादित भूमि को किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में हस्तांतरित नहीं किए जाने की मांग की गई थी। ऐसे में यथास्थिति आदेश का आशय केवल भूमि के हस्तांतरण पर रोक लगाना था, न कि निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाना।
इन्हीं तथ्यों के आधार पर उच्च न्यायालय ने समिति के अवमानना संबंधी आरोपों को निराधार मानते हुए विविध व्यवहार प्रकरण को निरस्त कर दिया।
मामले में कटनी कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय की ओर से अधिवक्ता दीपक पंजवानी और नेहा भाटिया ने पैरवी की।

















