नई दिल्ली, 14 जुलाई।
फीफा विश्व कप का दूसरा सेमीफाइनल अटलांटा में खेला जाना है, जो फुटबॉल प्रशंसकों के लिए किसी महामुकाबले से कम नहीं है। इसमें इंग्लैंड और अर्जेंटीना की टीमें आमने-सामने होंगी और दोनों का एकमात्र लक्ष्य खिताबी मुकाबले में अपनी जगह पक्की करना है। इस भिड़ंत के साथ ही विश्व फुटबॉल की दो चिर-प्रतिद्वंद्वी टीमों के बीच एक नया और रोमांचक अध्याय जुड़ने जा रहा है, जिसे देखने के लिए पूरी दुनिया बेताब है।
इन दोनों देशों के बीच फुटबॉल का इतिहास बेहद पुराना और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 1966 के विवादित रेड कार्ड से लेकर डिएगो माराडोना के मशहूर 'हैंड ऑफ गॉड' और डेविड बेकहम के यादगार मुकाबलों तक, यह प्रतिद्वंद्विता हमेशा चर्चा में रही है। प्रशंसकों को अब इस सेमीफाइनल से भी उसी तरह के रोमांच और कांटे की टक्कर की उम्मीद है।
इस बार सबकी निगाहें महान खिलाड़ी लियोनेल मेसी पर टिकी हैं। अपने लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में मेसी पहली बार इंग्लैंड के विरुद्ध कोई आधिकारिक सीनियर मैच खेलेंगे। 39 वर्षीय मेसी का इस टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म जारी है और उन्होंने अब तक आठ गोल दागकर अपनी टीम को सेमीफाइनल तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई है। अर्जेंटीना को न केवल मेसी, बल्कि जूलियन अल्वारेज़ जैसे खिलाड़ियों से भी काफी उम्मीदें हैं।
दूसरी तरफ, इंग्लैंड की टीम के कप्तान हैरी केन और जूड बेलिंघम लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। इन दोनों ने मिलकर अब तक 12 गोल किए हैं और वे विपक्षी टीम की रक्षा पंक्ति के लिए काल साबित हो रहे हैं। मैदान के बीचों-बीच मिडफील्ड की जंग सबसे निर्णायक होगी, जहाँ डेक्लान राइस और एलेक्सिस मैक एलिस्टर जैसे खिलाड़ी अपनी-अपनी टीमों की जीत का रास्ता तैयार करेंगे।
फाइनल का टिकट हासिल करने के लिए यह मुकाबला दोनों ही टीमों के लिए अपनी सर्वश्रेष्ठ ताकत दिखाने का मंच होगा। हैरी केन, बुकायो साका और एंथनी गॉर्डन की आक्रामक जोड़ी अर्जेंटीना के लिए मुसीबत बन सकती है, तो वहीं एंजो फर्नांडेज़ इंग्लैंड की रफ्तार रोकने की पूरी कोशिश करेंगे। यह महामुकाबला कौन जीतेगा, इसका फैसला तो मैदान पर ही होगा।
















