राजनीति
14 Jul, 2026

एनईएसएसी से पूर्वोत्तर में सीमा प्रबंधन और विकास को नई ताकत

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एनईएसएसी की अंतरिक्ष आधारित तकनीक भारत-म्यांमार सीमा के भू-स्थानिक मानचित्रण, आपदा प्रबंधन और पूर्वोत्तर के समग्र विकास को नई गति प्रदान कर रही है।

उमियाम, 14 जुलाई।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एनईएसएसी) अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के माध्यम से राष्ट्रीय रणनीतिक प्राथमिकताओं और पूर्वोत्तर के सामाजिक-आर्थिक विकास को नई मजबूती देने वाली महत्वपूर्ण संस्था के रूप में उभरकर सामने आया है। उन्होंने बताया कि संस्थान भारत-म्यांमार सीमा और पूर्वोत्तर के अंतरराज्यीय सीमावर्ती क्षेत्रों के भू-स्थानिक मानचित्रण सहित लगभग 130 अंतरिक्ष आधारित परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है।

मेघालय के उमियाम स्थित एनईएसएसी के दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत-म्यांमार सीमा और पूर्वोत्तर के अंतरराज्यीय क्षेत्रों का भू-स्थानिक मानचित्रण तेजी से किया जा रहा है। उनके अनुसार भू-स्थानिक तकनीक राष्ट्रीय सुरक्षा, संसाधन प्रबंधन और बेहतर प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

एनईएसएसी के निदेशक डॉ. एस.पी. अग्रवाल ने संस्थान की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में लगभग 130 परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। इनमें 50 परियोजनाएं हाल ही में पूरी की जा चुकी हैं, जबकि 78 परियोजनाएं कृषि, वानिकी, जल संसाधन, भूविज्ञान, शहरी एवं क्षेत्रीय योजना, भू-सूचना विज्ञान, उपग्रह संचार, यूएवी तकनीक, अंतरिक्ष एवं वायुमंडलीय विज्ञान, आपदा प्रबंधन तथा क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों से जुड़ी हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एनईएसएसी अत्याधुनिक वैज्ञानिक क्षमताओं और पूर्वोत्तर के आठ राज्यों की विकास आवश्यकताओं के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों के साथ बढ़ता सहयोग योजना निर्माण, सुशासन, संसाधन प्रबंधन और सार्वजनिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने एनईएसएसी, उत्तर पूर्व गन्ना एवं बांस विकास परिषद और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बांस मानचित्रण से संसाधनों की बेहतर योजना बनेगी, मूल्य श्रृंखला मजबूत होगी और क्षेत्र में स्थायी आजीविका के नए अवसर विकसित होंगे।

उन्होंने एनईएसएसी की बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक सटीक तथा स्थान-विशिष्ट बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। साथ ही चेरापूंजी स्थित रामकृष्ण मिशन के जल संचयन मॉडल जैसे सफल प्रयासों को व्यापक स्तर पर अपनाने की अपील की, ताकि पूर्वोत्तर में दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भू-स्थानिक तकनीक का उपयोग रणनीतिक सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ पर्यटन विकास में भी किया जाना चाहिए। उन्होंने ‘मंज़िल एनई’ डैशबोर्ड को और सशक्त बनाने, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने तथा केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप और निजी उद्योगों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर बल दिया।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर देश के सबसे गतिशील विकास क्षेत्रों में शामिल हो रहा है और एनईएसएसी अपने अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों के माध्यम से सुशासन, आपदा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग तथा तकनीक आधारित समावेशी विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।

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