राजनीति
14 Jul, 2026

संविधान लोकतांत्रिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता की आधारशिला: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि संविधान लोकतांत्रिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता की नींव है। उन्होंने न्यायपालिका, संवैधानिक अनुशासन और जनविश्वास को मजबूत लोकतंत्र के प्रमुख स्तंभ बताया।

नई दिल्ली, 14 जुलाई।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि भारतीय संविधान लोकतांत्रिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थाओं और न्याय व्यवस्था की नींव संस्थागत ईमानदारी, संवैधानिक अनुशासन और जनता के विश्वास पर टिकी होती है।

उपराष्ट्रपति ने मंगलवार को उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में पूर्व प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.आर. गवई के भाषणों, व्याख्यानों और विचारों के संकलन पर आधारित पुस्तक ‘द वॉयस ऑफ जस्टिस: जस्टिस गवई स्पीक्स’ का विमोचन किया। प्रोफेसर (डॉ.) एस. शिवकुमार द्वारा संपादित इस पुस्तक का प्रकाशन थॉमसन रॉयटर्स ने कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन (सीएलईए) के सहयोग से किया है।

इस अवसर पर राधाकृष्णन ने कहा कि यह पुस्तक न्यायिक चिंतन, संवैधानिक अनुशासन और सार्वजनिक उत्तरदायित्व का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसमें संविधानवाद, विधि के शासन, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था से जुड़े विचारों का समृद्ध संकलन है, जो संवैधानिक विमर्श और विधिक अध्ययन को नई दिशा देगा।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान एक जीवंत और निरंतर विकसित होने वाला दस्तावेज है, जिसने पिछले 75 वर्षों में अधिकार और कर्तव्य, निरंतरता और परिवर्तन तथा जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि संसद को संविधान संशोधन का अधिकार होने से देश समय की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को ढालने में सक्षम रहा है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि न्यायपालिका संवैधानिक शासन की रक्षा करने और विधि के शासन में नागरिकों का विश्वास बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में अधिकार के साथ संयम भी उतना ही आवश्यक है और मजबूत संस्थाएं लोकतांत्रिक मूल्यों, जनविश्वास और संवैधानिक अनुशासन के आधार पर ही कायम रहती हैं।

उन्होंने कहा कि संवैधानिक शासन को आम नागरिकों की आकांक्षाओं और बदलती सामाजिक परिस्थितियों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए। समाज के वंचित वर्गों को सशक्त बनाना गरिमा, अवसर और समान न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम है।

न्यायमूर्ति बी.आर. गवई की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनकी न्यायिक यात्रा संवैधानिक मूल्यों, संस्थागत संतुलन और सभी के लिए न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

समारोह के अंत में उन्होंने विधि समुदाय से समय-समय पर गरीब और जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का आह्वान किया, ताकि न्याय वास्तव में सभी के लिए सुलभ बन सके।

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