छतरपुर, 14 जुलाई।
मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार मंगलवार को छतरपुर जिले के बिजावर पहुंचे, जहां उन्होंने केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित किसान, दलित और आदिवासी परिवारों से मुलाकात की। बराना नदी में पिछले 11 दिनों से जारी जल सत्याग्रह में शामिल आंदोलनकारियों के बीच पहुंचकर उन्होंने उनकी समस्याएं सुनीं और प्रशासन से उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने की अपील की।
इस दौरान सिंघार ने कहा कि यह मामला केवल भूमि अधिग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों के सम्मान, आजीविका और अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि परियोजना प्रभावितों को न्यायसंगत मुआवजा, सम्मानजनक पुनर्वास और वैकल्पिक आजीविका की व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं कर पा रही है। उनका कहना था कि उचित मुआवजे और पुनर्वास के बिना लोगों का विस्थापन उचित नहीं है और सरकार को इस पूरे मामले में अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान किसानों, आदिवासियों और महिलाओं के साथ पुलिस ने सख्ती बरती। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध और जनभावनाओं का सम्मान होना चाहिए तथा बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशा जाना चाहिए।
धरनास्थल पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा के दौरान सिंघार ने प्रभावित परिवारों की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो कांग्रेस इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस परियोजना प्रभावितों के साथ खड़ी है और जब तक उन्हें उनका वाजिब हक, उचित मुआवजा तथा सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिल जाता, तब तक पार्टी का संघर्ष सड़क से सदन तक जारी रहेगा।

















