लखनऊ, 14 जुलाई।
संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और संघ राज्य क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने एक राष्ट्र, एक चुनाव के प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश में विभिन्न हितधारकों से संवाद शुरू किया है। भाजपा सांसद पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली समिति सांसदों, विधायकों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और समाज के विभिन्न वर्गों से सुझाव ले रही है। मंगलवार को भी यह प्रक्रिया जारी रही।
लखनऊ के गोमती नगर स्थित एक होटल में आयोजित बैठक के दौरान समिति ने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से मुलाकात कर एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव पर उनके सुझाव प्राप्त किए। इस अवसर पर विभिन्न जनप्रतिनिधियों और संगठनों के प्रतिनिधियों से भी विचार-विमर्श किया गया।
सतीश महाना ने कहा कि देश में लंबे समय से एक राष्ट्र, एक चुनाव की अवधारणा रही है। उनके अनुसार, एक साथ चुनाव केवल जनप्रतिनिधियों के लिए ही नहीं बल्कि आम जनता के लिए भी सुविधाजनक होंगे। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से जनता, जनप्रतिनिधियों और शासन व्यवस्था पर प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के कारण जनप्रतिनिधियों का काफी समय चुनाव में व्यतीत होता है, जबकि जनता उनसे विकास कार्यों और समस्याओं के समाधान की अपेक्षा रखती है। यदि चुनाव एक साथ होंगे तो जनप्रतिनिधि अधिक समय जनता की सेवा और विकास कार्यों को दे सकेंगे।
महाना ने कहा कि लगातार चुनाव होने से प्रशासनिक मशीनरी, सुरक्षा बल और सरकारी संसाधनों का बड़ा हिस्सा चुनावी कार्यों में लगा रहता है। एक साथ चुनाव होने से समय, संसाधनों और ऊर्जा की बचत होगी तथा विकास योजनाओं को भी गति मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव सुधार से जुड़े किसी भी निर्णय में सभी राजनीतिक दलों, संवैधानिक संस्थाओं, विशेषज्ञों और आम नागरिकों के सुझावों को महत्व दिया जाना चाहिए।
जेपीसी अपने लखनऊ प्रवास के दौरान उत्तर प्रदेश विधानमंडल के सदस्यों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, उद्योग एवं व्यापार संगठनों, प्रबुद्धजनों तथा मीडिया प्रतिनिधियों से भी संवाद कर रही है।
उल्लेखनीय है कि पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति तीन दिवसीय अध्ययन दौरे पर उत्तर प्रदेश पहुंची है। समिति का उद्देश्य लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने से जुड़े संवैधानिक, प्रशासनिक और व्यावहारिक पहलुओं पर सुझाव प्राप्त करना है। इससे पहले समिति महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात और गोवा में भी विभिन्न हितधारकों से चर्चा कर चुकी है। समिति में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 39 सदस्य शामिल हैं और प्राप्त सुझावों को अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
इस दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी 'वन नेशन, वन इलेक्शन' का समर्थन करते हुए कहा कि आजादी के बाद शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होते थे। उन्होंने कहा कि बाद में अलग-अलग समय पर चुनाव होने लगे, जिससे सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस विजन का समर्थन करते हुए कहा कि एक देश, एक चुनाव लागू होना चाहिए।

















