नई दिल्ली, 16 जुलाई।
सीबीएसई पाठ्यक्रम में कक्षा 9 से तीसरी भाषा लागू करने के प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत का मानना है कि इस स्तर पर नई भाषा के जुड़ने से विद्यार्थियों पर पढ़ाई का तनाव काफी बढ़ जाएगा।
कोर्ट ने केंद्र सरकार को सलाह दी है कि यदि तीसरी भाषा लागू करनी है, तो इसे कक्षा 5 या 6 से ही शुरू किया जाना चाहिए। इससे छात्र इसे बेहतर तरीके से समझ पाएंगे और उन पर बोझ भी नहीं पड़ेगा।
न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने मौखिक रूप से केंद्र से कहा है कि वे कक्षा 9 के स्तर पर इस बदलाव को न लाएं। यह टिप्पणी तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आई है, जिसमें राज्य के हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय खोलने के मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।
तमिलनाडु सरकार लंबे समय से इन स्कूलों में अपनाई जाने वाली त्रिभाषी नीति का विरोध कर रही है। राज्य का तर्क है कि यह नीति स्थानीय भाषा और शिक्षा प्रणाली के अनुकूल नहीं है, जिसके चलते इस मामले में कानूनी लड़ाई जारी है।













