संपादकीय
16 Jul, 2026

नए वोटर के लिए एसआईआर जरूरी

नए मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 में एसआईआर से जुड़ी अनिवार्य घोषणा जोड़कर चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में नई पहल की है।

नई दिल्ली, 16 जुलाई।

मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में चुनाव आयोग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब नए मतदाता का नाम जोड़ने के लिए भी एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) से संबंधित जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए ऑनलाइन फॉर्म-6 के प्रारूप में बदलाव किया गया है। हालांकि, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 तथा उसके नियमों में अभी कोई औपचारिक संशोधन नहीं हुआ है और हार्ड कॉपी के माध्यम से आवेदन करने की प्रक्रिया पहले की तरह ही जारी रहेगी।

चुनाव आयोग के पोर्टल पर उपलब्ध फॉर्म-6 में भाग ‘जे’ और ‘के’ के बीच एक नया घोषणा-पत्र जोड़ा गया है। यह घोषणा-पत्र भरना अनिवार्य होगा। इसके बिना ऑनलाइन आवेदन सबमिट नहीं किया जा सकेगा। यानी अब प्रत्येक नए आवेदक को यह बताना होगा कि उसका नाम अथवा उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर की मतदाता सूची में दर्ज है या नहीं।

आयोग ने इसके लिए तीन विकल्प दिए हैं। पहला, मेरा नाम पिछली एसआईआर की मतदाता सूची में मौजूद है। दूसरा, मेरे माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर की मतदाता सूची में मौजूद है। तीसरा, न तो मेरा नाम और न ही मेरे माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर की मतदाता सूची में मौजूद है।

यदि आवेदक पहले या दूसरे विकल्प का चयन करता है, तो उसे संबंधित विधानसभा क्षेत्र, मतदान केंद्र (बूथ) तथा पिछली एसआईआर में अपने या अपने माता-पिता के नाम की क्रम संख्या भी दर्ज करनी होगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य डुप्लिकेट नाम, फर्जी प्रविष्टियों तथा एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होने जैसी समस्याओं को रोकना है। जिन राज्यों में हाल ही में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हुई है, वहां यह नया कॉलम सबसे पहले लागू किया गया है। चुनाव आयोग का मानना है कि मतदाता सूची की शुद्धता तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब नई प्रविष्टियों का भी पुराने रिकॉर्ड से मिलान किया जाए। पहले यह जांच केवल विशेष पुनरीक्षण के दौरान होती थी, लेकिन अब इसे नाम जोड़ने की प्रक्रिया का भी हिस्सा बना दिया गया है।

यह बदलाव तकनीकी रूप से भले छोटा दिखाई दे, लेकिन इसका प्रभाव व्यापक हो सकता है। इससे फर्जी मतदाता बनने की संभावना कम होगी और परिवारों की पीढ़ी-दर-पीढ़ी मतदाता सूची में निरंतरता भी बनी रहेगी। कई बार ऐसा होता था कि कोई व्यक्ति दूसरे राज्य या जिले में जाकर नए पते पर अपना नाम जुड़वा लेता था, जबकि पुराने पते से उसका नाम नहीं हटता था। नए कॉलम के माध्यम से ऐसे मामलों की पहचान करना अपेक्षाकृत आसान होगा।

हालांकि, इस बदलाव को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। पहला, जिन लोगों के माता-पिता के पास पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं या जिनके परिवार का नाम किसी कारणवश पिछली एसआईआर में दर्ज नहीं था, उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। दूसरा, ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में इंटरनेट और आवश्यक दस्तावेजों की कमी के कारण ऑनलाइन आवेदन करना आसान नहीं होगा। तीसरा, यह घोषणा-पत्र अनिवार्य तो कर दिया गया है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति इसमें गलत जानकारी देता है तो उसके विरुद्ध क्या कार्रवाई होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि नियमों में संशोधन का अधिकार केंद्र सरकार के पास है और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 28 के तहत ही आगे की प्रक्रिया होगी। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से नियमों में किसी संशोधन की अधिसूचना जारी नहीं की गई है। इसलिए हार्ड कॉपी के माध्यम से आवेदन करने की मौजूदा व्यवस्था पूर्ववत लागू रहेगी।

इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया भी मिली-जुली रही है। कुछ दलों ने इसे मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में स्वागत योग्य कदम बताया है, जबकि कुछ का मानना है कि इससे नए मतदाताओं, विशेषकर 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं के लिए प्रक्रिया कुछ जटिल हो सकती है, क्योंकि उन्हें अपने माता-पिता या परिवार के पुराने मतदाता विवरण जुटाने में कठिनाई आ सकती है।

मतदाता जागरूकता के दृष्टिकोण से भी यह बदलाव महत्वपूर्ण है। अब स्कूलों, कॉलेजों और विशेष मतदाता पंजीकरण शिविरों में युवाओं को केवल फॉर्म-6 भरना ही नहीं सिखाया जाएगा, बल्कि उन्हें अपने परिवार के पुराने मतदाता रिकॉर्ड की जानकारी रखने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। इससे परिवारों में मतदाता सूची के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। फॉर्म-6 में एसआईआर से संबंधित कॉलम जोड़ना उसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका उद्देश्य लोकतंत्र को मजबूत करना और प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सही ढंग से मतदाता सूची में शामिल करना है। अब यह देखना होगा कि बीएलओ (BLO) और चुनाव अधिकारी इस नई व्यवस्था को जमीनी स्तर पर कितनी सहजता से लागू कर पाते हैं और आम नागरिक इसे कितनी आसानी से समझकर अपने मताधिकार का उपयोग सुनिश्चित कर पाता है। अंततः लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि मतदाता सूची में हर पात्र नागरिक का नाम हो और कोई भी अपात्र नाम उसमें शामिल न रहे।

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