नई दिल्ली, 22 जुलाई।
आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के तोतापुरी आम उत्पादक किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने इसकी खेती, प्रोसेसिंग और विपणन व्यवस्था में व्यापक सुधार की तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
किसानों की शिकायतों के बाद गठित विशेषज्ञ समिति ने खेतों, मंडियों और पल्प निर्माण इकाइयों का दौरा कर स्थिति का आकलन किया। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रोसेसिंग क्षमता की कमी, समय पर खरीद नहीं होने और आम आधारित पेयों में कम मात्रा में पल्प इस्तेमाल होने से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
कृषि भवन में आयोजित बैठक में समिति ने आम आधारित पेयों में 22 से 25 प्रतिशत वास्तविक आम का गूदा अनिवार्य किए जाने की सिफारिश की। इस प्रस्ताव पर कृषि, वित्त, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य मंत्रालय, एफएसएसएआई और जीएसटी परिषद के साथ अंतर-मंत्रालयी स्तर पर चर्चा की जाएगी।
बैठक में तोतापुरी आम की कीमतों को स्थिर रखने के लिए केंद्रीय समन्वय एवं मूल्य स्थिरीकरण समिति गठित करने, क्षेत्रीय स्तर पर खरीद व्यवस्था विकसित करने और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से प्रोसेसिंग गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
विशेषज्ञ समिति ने पुराने आम के बागों के कायाकल्प के लिए टॉप-वर्किंग तकनीक अपनाने तथा नीलम, अल्फांसो, हिम्मायत और बंगनपल्ली जैसी उच्च मूल्य वाली किस्मों को प्रोत्साहित करने की सिफारिश की। साथ ही फलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए शुरुआती चरण में 23,333 हेक्टेयर क्षेत्र में फ्रूट बैग उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया।
बैठक में आंध्र प्रदेश सरकार को पंजीकृत प्रोसेसिंग इकाइयों के लिए हर वर्ष 15 मई से खरीद और पल्प निर्माण शुरू करने संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करने की भी अनुशंसा की गई।
बैठक में एपीडा, आईसीएआर और संबंधित राज्य सरकारों के सहयोग से तोतापुरी आम और उससे बने उत्पादों के घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार के विस्तार पर भी चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए तोतापुरी आम की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने और ठोस कार्ययोजना लागू करने के लिए सभी संबंधित संस्थाओं के साथ मिलकर काम करेगी।











