काठमांडू, 23 जुलाई।
नेपाल सरकार ने इसी शैक्षणिक सत्र से देश के सभी विश्वविद्यालयों में 10 प्रतिशत अनिवार्य छात्रवृत्ति व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने का फैसला किया है। शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सभी 21 विश्वविद्यालयों और 8 स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठानों को निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके बाद विभिन्न विश्वविद्यालयों ने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
नई व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर अध्ययन कर रहे करीब 72,929 विद्यार्थियों को पूर्ण छात्रवृत्ति के साथ निःशुल्क उच्च शिक्षा का अवसर मिलेगा। वर्तमान में देश के विश्वविद्यालयों और स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठानों में कुल 7,29,294 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, 10 प्रतिशत छात्रवृत्ति का प्रावधान पहले से मौजूद था, लेकिन इसका व्यवस्थित पालन नहीं हो रहा था। अब सभी विश्वविद्यालयों और संबंधित संस्थानों के लिए इसे लागू करना अनिवार्य होगा। मंत्रालय का मानना है कि इससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा हासिल करने में राहत मिलेगी।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की छात्रवृत्ति निर्देशिका के अनुसार मेधावी, दलित, मुस्लिम, आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के साथ संघर्ष प्रभावित, पिछड़े तथा लक्षित समुदायों के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ मिलेगा। इसके अलावा विश्वविद्यालय अपने नियमों और कानूनों के अनुसार अतिरिक्त पात्रता मानदंड भी तय कर सकेंगे।
नेपाल में इस समय 15 संघीय विश्वविद्यालय, 6 प्रादेशिक विश्वविद्यालय और 8 स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान संचालित हैं। विदेशी विश्वविद्यालयों से संबद्ध 58 कॉलेजों में अध्ययनरत 34,465 विद्यार्थियों पर भी यह नियम अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। उच्च शिक्षा में 10 प्रतिशत छात्रवृत्ति का कानूनी प्रावधान पहले से था, लेकिन पारदर्शी व्यवस्था, नियमित निगरानी और भरोसेमंद आंकड़ों के अभाव में इसे प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा सका था।
इस बार शिक्षा मंत्रालय ने सभी विश्वविद्यालयों को छात्रवृत्ति का अनिवार्य पालन, सार्वजनिक सूचना जारी करने, आंकड़ों का संकलन और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए हैं। शिक्षामंत्री सस्मित पोखरेल ने कहा कि काठमांडू महानगरपालिका के विद्यालयों में सफल रही छात्रवृत्ति व्यवस्था के अनुभव के आधार पर अब इसे विश्वविद्यालय स्तर पर भी संस्थागत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध कॉलेजों में कम से कम 10 प्रतिशत विद्यार्थियों को पूर्ण छात्रवृत्ति देना अनिवार्य होगा।










