नई दिल्ली, 23 जुलाई।
भारतीय जूडो को लंबे अरसे से जिस मजबूत और प्रभावी खिलाड़ी विकास प्रणाली की आवश्यकता महसूस हो रही थी, उसका सकारात्मक परिणाम अब अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्पष्ट नजर आने लगा है। उत्कृष्ट प्रशिक्षण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और निरंतर मिलने वाले सहयोग के बलबूते चार भारतीय महिला जूडो खिलाड़ियों ने आगामी ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए राष्ट्रीय टीम में अपनी पक्की जगह बना ली है।
इस प्रतिष्ठित बहु-खेल महाकुंभ के लिए चुनी गई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में मध्य प्रदेश की यामिनी मौर्या, उत्तराखंड की उन्नति शर्मा, पंजाब की इशरूप नारंग तथा मणिपुर की तखेलंबम इनुंगनबी के नाम शामिल हैं। इन सभी चारों खिलाड़ियों ने बीते कुछ वर्षों के दौरान अपने खेल का स्तर लगातार ऊंचा उठाते हुए राष्ट्रीय टीम में अपना स्थान सुनिश्चित किया है।
इन सभी खिलाड़ियों को एक्सिस बैंक और इन्सपायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स के संयुक्त तत्वावधान में चलाए जा रहे विशेष खिलाड़ी विकास कार्यक्रम के जरिए उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और तमाम जरूरी सुविधाएं प्राप्त होती रही हैं। इस अनूठी पहल के माध्यम से अब तक 500 से अधिक उभरते हुए एथलीटों को सहायता पहुंचाई जा चुकी है, जिनमें 471 जूनियर और 53 वरिष्ठ महिला जूडो खिलाड़ी शामिल हैं।
इस समर्पित कार्यक्रम के साथ जुड़कर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 140 से ज्यादा पदक अपने नाम किए हैं। इसके अलावा इन खिलाड़ियों को जापान, जॉर्जिया और उज्बेकिस्तान जैसे दिग्गज देशों में आयोजित कुल 11 अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों में भाग लेने का बेहतरीन अवसर मिला, जिससे उन्हें विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा का अमूल्य अनुभव हासिल हुआ।
एक्सिस बैंक के वरिष्ठ अधिकारी विजय मुलबगल ने इस उपलब्धि पर अपने विचार रखते हुए कहा कि खिलाड़ियों को सही और अनुकूल माहौल तथा उच्चस्तरीय प्रशिक्षण मुहैया कराने से उनके प्रदर्शन में लगातार सुधार हो रहा है और कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए चार महिला खिलाड़ियों का चुना जाना इसी दिशा में एक मील का पत्थर है।
वहीं दूसरी ओर, आईआईएस की प्रमुख मनीषा मल्होत्रा ने कहा कि उनके संस्थान का मुख्य उद्देश्य केवल खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देना भर नहीं है, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता के शिखर तक पहुंचाने के लिए हरसंभव संसाधन उपलब्ध कराना है।
भारतीय जूडो में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उभरकर सामने आने वाली नई प्रतिभाओं, विशेष रूप से देश के पूर्वोत्तर तथा अन्य राज्यों से आने वाली महिला खिलाड़ियों की बढ़ती संख्या यह स्पष्ट संकेत देती है कि खेल का बुनियादी ढांचा तेजी से मजबूत हो रहा है। अब देशवासियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ये चारों खिलाड़ी कॉमनवेल्थ गेम्स के मैदान पर अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत के पदक अभियान को किस बुलंदी तक पहुंचा पाती हैं।










