अनूपपुर, 29 जुलाई।
अनूपपुर में जिला न्यायालय भवन और न्यायिक अधिकारियों के आवास निर्माण का वर्षों पुराना मामला अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। वर्ष 2003 में जिला बनने के बाद भी करीब 23 वर्ष बीत जाने के बावजूद भवन निर्माण के लिए बजट जारी नहीं होने पर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। लंबे समय से लंबित इस मामले में अब सरकार से जवाब तलब किया गया है।
जानकारी के अनुसार, जिले के प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने न्यायालय भवन निर्माण की घोषणा की थी। इसके बाद विधायकों ने भी विधानसभा में यह मुद्दा उठाया, जबकि जिला न्यायालय अधिवक्ता संघ लगातार ज्ञापन देकर बजट जारी करने की मांग करता रहा। इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका और मामला वर्षों तक लंबित रहा।
अधिवक्ता दीपक कुमार पांडे ने बताया कि इस संबंध में जबलपुर हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई थी। प्रारंभिक सुनवाई में न्यायालय ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन लगभग एक वर्ष बीतने के बाद भी संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मामले को गंभीर मानते हुए मध्य प्रदेश सरकार के विधि सचिव को 3 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता बासु देव चटर्जी ने कहा कि न्यायालय के इस निर्देश से अब यह उम्मीद बढ़ी है कि जिला न्यायालय भवन और न्यायिक अधिकारियों के आवास निर्माण के लिए लंबित बजट जारी हो सकेगा। उनका कहना है कि न्यायालय की सख्ती से लंबे समय से अटकी इस परियोजना को गति मिलने की संभावना बनी है।
अधिवक्ता दीपक कुमार पांडे ने बताया कि वर्तमान में जिला न्यायालय परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में पक्षकार और आम नागरिक पहुंचते हैं, लेकिन उनके बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। न्यायिक अधिकारियों के लिए आवास उपलब्ध नहीं हैं और अधिवक्ताओं को भी सीमित संसाधनों में कार्य करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक प्रशासनिक स्तर पर समाधान नहीं मिलने के बाद न्यायालय की शरण लेना मजबूरी बन गया था। उनका विश्वास है कि इस पहल से जिले में न्यायिक अधोसंरचना के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।

















