शिमला, 29 जुलाई।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपनी संपत्ति को लेकर विरोधी दलों द्वारा उठाए जा रहे तमाम सवालों का कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके द्वारा कोई भी नई संपत्ति नहीं खरीदी गई है।
उन्होंने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी संपत्ति का पूरा ब्योरा पहले ही चुनावी हलफनामे में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जा चुका है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी एडीआर की रिपोर्ट को लेकर भाजपा द्वारा की जा रही बयानबाजी पर उन्होंने कहा कि उन्हें जानबूझकर बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।
मुख्यमंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि जिस जमीन और मकान का जिक्र किया जा रहा है, उसे उन्होंने राजनीति में आने तथा सर्वोच्च पद संभालने से काफी पहले खरीदा था। समय बीतने के साथ-साथ उन जमीनों के बाजार मूल्य में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है जिसके कारण कुल संपत्ति के आंकड़े में इजाफा दिखाई दे रहा है।
एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक देश भर के मुख्यमंत्रियों की संपत्ति का विश्लेषण किया गया है जिसमें हिमाचल के मुखिया की संपत्ति सात करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। सुक्खू ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि किसी को भी उनकी कमाई पर कोई शक है तो वे केंद्र सरकार की किसी भी एजेंसी से इसकी पूरी जांच करवा सकते हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रिपोर्ट में उनकी शैक्षणिक योग्यताओं जैसे एमए और एलएलबी की डिग्रियों का सही ढंग से जिक्र नहीं किया गया है जिसमें सुधार की जरूरत है। कांग्रेस पार्टी के कुछ विधायकों के दल बदलने की चल रही अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि जो जाना चाहते हैं वे अपनी इच्छा से जा सकते हैं।
पार्टी को बिकाऊ लोगों की कोई जरूरत नहीं है बल्कि उन्हें ऐसे समर्पित कार्यकर्ताओं की तलाश है जो वैचारिक रूप से संगठन के साथ मजबूती से खड़े रह सकें। इसके अलावा शिक्षा मंत्री के बयानों और प्रियंका गांधी की टिप्पणी का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को साफ-सुथरा रखने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
















