शिमला, 29 जुलाई।
हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने कर्मचारियों के तबादले से जुड़े नियमों में बहुत बड़े बदलाव कर दिए हैं। प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने स्थानांतरण नीति को और अधिक सख्त बना दिया है।
नए आदेश के तहत अब दुर्गम, जनजातीय और कठिन क्षेत्रों में तैनात कर्मियों को तय समय से पहले वहां से हटने का मौका नहीं मिलेगा। कार्मिक विभाग की तरफ से व्यापक मार्गदर्शक सिद्धांत के नियमों में संशोधन करके यह नई व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू कर दी गई है।
सरकार का यह मानना है कि पहले के नियमों में कई तरह की अस्पष्टताएं थीं जिससे काम में बाधा आ रही थी और कई तरह की भ्रम की स्थिति बन रही थी। संशोधित नियमों के मुताबिक अब इन दुर्गम इलाकों में कार्यकाल पूरे तीन साल का होगा जिसे पूरी सख्ती के साथ पूरा करना अनिवार्य किया गया है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि तीन साल का सीधा मतलब वास्तव में दो सर्दियां और तीन गर्मियां बिताना होगा। यदि कोई भी कर्मी लंबी छुट्टी पर रहता है या ड्यूटी से गायब रहता है तो उस गैर-हाजिरी की अवधि को इस कार्यकाल में बिल्कुल नहीं जोड़ा जाएगा।
वापस लौटने के बाद कर्मचारी को बची हुई अवधि की सेवा उसी कठिन क्षेत्र में पूरी करनी होगी ताकि जनता की सेवाएं प्रभावित न हों। किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के पांगी जैसे दूरदराज के इलाकों में कर्मचारियों की कमी से निपटने के लिए यह कदम उठाया गया है।
इसके अलावा अतिरिक्त कार्यभार संभालने वाले लोगों को भी यह स्पष्ट कर दिया गया है कि नियमित तैनाती के बिना वह सेवा मान्य नहीं होगी। 55 वर्ष से अधिक आयु वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को इस नई नीति के तहत कुछ खास राहत देने का प्रावधान भी किया गया है।
सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि सभी सरकारी विभागों और बोर्डों को इन नए नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा।
















