कोलकाता, 30 जुलाई।
भारत ने जैव विविधता और वर्गिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन कार्यरत जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जेडएसआई) ने देश की तितलियों और पतंगों की पहली राष्ट्रीय सूची तैयार करने की घोषणा की है।
इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा जैव विविधता संपन्न देशों में शामिल हो गया है, जहां इन जीवों का अद्यतन और प्रमाणिक राष्ट्रीय अभिलेख उपलब्ध है।
यह परियोजना जेडएसआई के वैज्ञानिक डॉ. नवनीत सिंह और डॉ. राहुल जोशी के नेतृत्व में 12 वर्षों की लगातार मेहनत के बाद पूरी हुई है। इस दौरान देशभर में क्षेत्रीय सर्वेक्षण किए गए, संग्रहालयों में संरक्षित नमूनों का अध्ययन किया गया और वैज्ञानिक साहित्य का विस्तृत सत्यापन किया गया। इस श्रृंखला का अंतिम और निर्णायक भाग अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका जूटाक्सा में प्रकाशित हुआ है।
जेडएसआई के अनुसार, यह परियोजना पिछले एक सदी से अधिक समय से चली आ रही वर्गिकी संबंधी कमियों को दूर करती है। भविष्य में यह जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिकी अध्ययन और जलवायु परिवर्तन अनुसंधान के लिए आधारभूत दस्तावेज के रूप में काम करेगी।
कैटलॉग के मुताबिक, भारत में तितलियों और पतंगों की 13 हजार 703 प्रजातियां पाई जाती हैं। इन्हें तीन हजार 705 वंश, 240 उपकुल, 102 कुल और 31 महाकुल में वर्गीकृत किया गया है। दुनिया में ज्ञात इन जीवों की कुल प्रजातियों में लगभग 8.25 प्रतिशत भारत में मौजूद हैं।
अंतिम प्रकाशित खंड में शेष 1689 प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया है, जिससे वर्गिकी से जुड़े कई पुराने सवालों का समाधान हुआ है।
जेडएसआई ने गुरुवार को बताया कि भारत जियोमेट्रोइडिया समूह की पतंगों के लिए भी दुनिया में एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर सामने आया है। देश में इस समूह की दो हजार 205 प्रजातियां, 479 वंश, 13 उपकुल और चार कुल दर्ज किए गए हैं, जो विश्व में ज्ञात जियोमेट्रोइडिया प्रजातियों का करीब 8.80 प्रतिशत है।
इनमें सबसे बड़ा कुल जियोमेट्रिडी है, जिसकी 2100 प्रजातियां दर्ज हैं। इसके अलावा यूरानिडी की 95, एपिकोपिडी की 9 और स्यूडोबिस्टोनिडी की एक प्रजाति भारत में पाई जाती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, तितलियां और पतंगे पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा हैं। ये परागण, खाद्य श्रृंखला, जैविक अपघटन और कृषि व वानिकी से जुड़े संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हिमालय से लेकर पश्चिमी घाट के वर्षावनों तक फैले भारत के विविध प्राकृतिक क्षेत्र इन प्रजातियों के संरक्षण के लिए अनुकूल हैं।
जेडएसआई की निदेशक डॉ. धृति बनर्जी ने कहा कि यह कैटलॉग देश की जैव विविधता, पारिस्थितिकी निगरानी और वैश्विक संरक्षण प्रयासों के लिए अमूल्य राष्ट्रीय धरोहर साबित होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे वैज्ञानिक दस्तावेज प्रजातियों को स्पष्ट पहचान देने के साथ संरक्षण नीतियां तैयार करने में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।
















