नई दिल्ली, 30 जुलाई।
बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद अब बीमा क्षेत्र में कदम रखने जा रही है। आईआरडीएआई ने पतंजलि आयुर्वेद और धर्मपाल सत्यपाल समूह को मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के बाद करीब 4,500 करोड़ रुपये की अधिग्रहण डील पूरी होने का रास्ता साफ हो गया है।
इस सौदे के तहत पतंजलि आयुर्वेद मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में 73.6 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी, वहीं डीएस ग्रुप को 24.5 प्रतिशत हिस्सेदारी मिलेगी। यह हिस्सेदारी आदार पूनावाला समूह की सनोटी प्रॉपर्टीज और अन्य मौजूदा शेयरधारकों से खरीदी जाएगी।
कंपनी की ओर से शेयर बाजार को दी गई जानकारी के अनुसार, आईआरडीएआई ने 28 जुलाई 2026 को जारी पत्र के माध्यम से इस अधिग्रहण को मंजूरी दी है। यह स्वीकृति पत्र जारी होने की तारीख से तीन महीने तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में खरीदार समूह को शेयर हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी और नियामक की सभी शर्तों का पालन करना होगा।
मंजूरी मिलने के बाद पतंजलि मैग्मा जनरल इंश्योरेंस की प्रमोटर कंपनी बन जाएगी, जबकि डीएस ग्रुप सह-निवेशक की भूमिका में रहेगा। कंपनी की वृद्धि और वित्तीय मजबूती के लिए पतंजलि आगे भी इसमें पूंजी निवेश कर सकती है।
हालांकि, इस मंजूरी का मतलब यह नहीं है कि बाजार में तुरंत पतंजलि इंश्योरेंस नाम से कोई नई बीमा कंपनी या उत्पाद शुरू हो जाएगा। पतंजलि पहले से संचालित हो रही मैग्मा जनरल इंश्योरेंस का अधिग्रहण कर रही है, जो मोटर, स्वास्थ्य, संपत्ति सहित 70 से अधिक सामान्य बीमा उत्पाद उपलब्ध कराती है।
यह अधिग्रहण पतंजलि के लिए केवल निवेश नहीं, बल्कि एफएमसीजी कारोबार से आगे बढ़कर वित्तीय सेवा क्षेत्र में विस्तार का बड़ा अवसर माना जा रहा है। मैग्मा जनरल इंश्योरेंस ने पिछले कुछ वर्षों में अच्छी वृद्धि दर्ज की है, जिससे यह सौदा और महत्वपूर्ण हो गया है।
पतंजलि के पास देशभर में करीब 2 लाख खुदरा बिक्री केंद्रों का नेटवर्क है। इसके अलावा राष्ट्रीय खुदरा श्रृंखला और 250 से अधिक पतंजलि मेगा स्टोर भी मौजूद हैं। माना जा रहा है कि इस मजबूत नेटवर्क के जरिए मैग्मा जनरल इंश्योरेंस छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक अपनी पहुंच बढ़ा सकती है।
इस अधिग्रहण की शुरुआत मार्च 2025 में हुई थी। उस समय पतंजलि के नेतृत्व वाले खरीदार समूह और मौजूदा शेयरधारकों के बीच शेयर खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। 12 मार्च 2025 को इसकी जानकारी शेयर बाजार को दी गई थी। हालांकि नियामकीय प्रक्रिया में समय लगने के कारण 12 मार्च 2026 को समझौते की अंतिम अवधि को आगे बढ़ाना पड़ा था।
समझौते पर हस्ताक्षर होने के करीब 16 महीने बाद अब आईआरडीएआई की मंजूरी मिली है। स्वीकृति मिलने के बाद अगले तीन महीनों में शेयर हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और तय नियमों को पूरा करने के बाद यह अधिग्रहण औपचारिक रूप से पूरा हो जाएगा।
















