गुवाहाटी, 30 जुलाई।
असम में बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। राज्य के सात जिले अब भी बाढ़ प्रभावित हैं। इस आपदा में तीन और लोगों की मौत हुई है, जिसके बाद मृतकों की कुल संख्या 78 पहुंच गई है।
बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन प्रभावित इलाकों में लोगों की मुश्किलें बनी हुई हैं। ऊपरी असम के शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। कई लोग अब भी अपने घरों में वापस नहीं लौट पा रहे हैं।
पानी उतरने के बाद घरों और स्कूलों में मिट्टी की गाद जमा हो गई है, जिससे प्रभावित लोगों के सामने सफाई और पुनर्वास की नई चुनौती खड़ी हो गई है।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, असम की सभी नदियां अब खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। गोलाघाट में एक और शिवसागर में दो लोगों के शव मिले हैं।
बाढ़ से प्रभावित जिलों में चराईदेव, गोलाघाट, शिवसागर, नगांव, बिश्वनाथ, जोरहाट और कामरूप मेट्रो शामिल हैं। इन जिलों के 21 राजस्व मंडलों के 551 गांवों में करीब 3 लाख से अधिक लोग अभी भी प्रभावित हैं। वहीं 21,523.08 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है।
सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए 71 राहत शिविर और 30 राहत वितरण केंद्रों सहित कुल 101 केंद्र संचालित किए हैं। राहत शिविरों में 16,567 लोग रह रहे हैं, वहीं 72,210 गैर-शिविर प्रभावित लोगों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
राहत और बचाव अभियान में एसडीआरएफ, सेना, अर्धसैनिक बल, एनडीआरएफ, वायुसेना, पुलिस, अग्निशमन दल और स्थानीय प्रशासन की टीमें जुटी हुई हैं।
सरकार ने 108 मेडिकल टीमों को तैनात किया है और 20 नावों के जरिए भी राहत कार्य चलाया जा रहा है। बाढ़ से सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जिसकी मरम्मत के लिए लगातार समीक्षा की जा रही है।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए असम विधानसभा का बजट सत्र तय समय से दो दिन पहले 29 जुलाई को ही समाप्त कर दिया गया। सत्र पहले 31 जुलाई तक चलना निर्धारित था।
















