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राजनीति
03 Aug, 2026

बांकीपुर जीत के बाद नई पहचान, रणनीतिकार से जननेता बने प्रशांत किशोर

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत के बाद प्रशांत किशोर ने चुनावी रणनीतिकार से जनप्रतिनिधि तक का सफर तय करते हुए सक्रिय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान स्थापित की है।

पटना, 03 अगस्त।

बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में जीत हासिल करने के बाद प्रशांत किशोर एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गए हैं। लंबे समय तक देश के प्रमुख चुनावी रणनीतिकार के रूप में पहचान रखने वाले प्रशांत किशोर ने इस जीत के साथ सक्रिय राजनीति में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। चुनावी रणनीति तैयार करने वाले विशेषज्ञ से जनता के जनादेश से चुने गए जनप्रतिनिधि बनने तक का उनका सफर भारतीय राजनीति में एक अहम बदलाव माना जा रहा है।

20 मार्च 1977 को बिहार के रोहतास जिले के कोनार गांव में जन्मे प्रशांत किशोर का बचपन मुख्य रूप से बक्सर में बीता। उनके पिता डॉ. श्रीकांत पांडेय सरकारी चिकित्सक थे और सेवा के दौरान परिवार लंबे समय तक बक्सर तथा शाहपुर में रहा। आज भी बक्सर में उनका पैतृक घर है, जहां परिवार के सदस्य निवास करते हैं। सक्रिय राजनीति में आने के बाद भी उनका अपने गांव और बक्सर से जुड़ाव बना हुआ है।

प्रशांत किशोर का पारिवारिक जीवन सामान्य पृष्ठभूमि वाला रहा है। उनके पिता ने सरकारी चिकित्सक के रूप में लंबे समय तक सेवाएं दीं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। परिवार के अधिकांश सदस्य सार्वजनिक जीवन और राजनीति से दूर हैं। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनके चार भाई-बहन हैं। बड़े भाई अजय किशोर व्यवसाय से जुड़े हैं, जबकि अन्य सदस्य निजी जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास पेशे से चिकित्सक हैं और असम के गुवाहाटी की रहने वाली हैं। बताया जाता है कि दोनों की मुलाकात संयुक्त राष्ट्र के एक स्वास्थ्य कार्यक्रम के दौरान हुई थी। पेशेवर परिचय समय के साथ दोस्ती में बदला और बाद में दोनों ने विवाह किया। चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके बेटे का नाम दैबिक भारद्वाज है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका सफर उल्लेखनीय रहा है। प्रारंभिक शिक्षा बिहार में पूरी करने के बाद उन्होंने पटना साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। इसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए) की डिग्री प्राप्त की। उच्च शिक्षा के बाद उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य किया और संयुक्त राष्ट्र के साथ जुड़कर स्वास्थ्य एवं विकास से संबंधित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में योगदान दिया।

संयुक्त राष्ट्र में कार्य करने के बाद उन्होंने चुनावी रणनीति के क्षेत्र में कदम रखा और जल्द ही देश के चर्चित राजनीतिक रणनीतिकारों में शामिल हो गए। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के चुनाव अभियान से जुड़ने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने विभिन्न राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए चुनावी रणनीति तैयार की तथा कई सफल अभियानों का हिस्सा रहे।

बाद के वर्षों में उन्होंने चुनावी सलाहकार की भूमिका से आगे बढ़ते हुए बिहार की राजनीति में सक्रिय प्रवेश किया। जन सुराज अभियान की शुरुआत कर उन्होंने राज्यभर में जनसंवाद यात्राएं कीं और संगठन निर्माण पर विशेष जोर दिया। इस अभियान के माध्यम से विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुशासन को अपनी राजनीति का प्रमुख आधार बनाया।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली जीत को उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इस सफलता के साथ वह केवल चुनावी रणनीतिकार ही नहीं, बल्कि जनता के जनादेश से चुने गए सक्रिय राजनीतिक नेता के रूप में भी स्थापित हुए हैं। अब बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका, जन सुराज के विस्तार और आगे की राजनीतिक रणनीति पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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