अनूपपुर, 5 अगस्त।
अनूपपुर जिले के अमरकंटक स्थित प्राचीन रंगमहल मंदिर में विराजमान पातालेश्वर महादेव सहित अन्य देवस्थानों में नियमित पूजा-अर्चना शुरू नहीं होने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। मंदिर के पुरातत्व विभाग के नियंत्रण में होने के कारण धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने न्यायालय के आदेश के प्रभावी पालन की मांग उठाई है।
बुधवार को भगवा पार्टी के जिला अध्यक्ष कन्हैयालाल मिश्र ने कहा कि श्रद्धालुओं को निर्बाध दर्शन और पूजा का अधिकार मिलना चाहिए। उनका कहना था कि न्यायालय के निर्णय के अनुरूप मंदिर में नियमित धार्मिक गतिविधियां सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कन्हैयालाल मिश्र ने कहा कि रंगमहल मंदिर एक निजी धार्मिक संपत्ति है और यहां पूजा-अर्चना के अधिकार को न्यायालय भी मान्यता दे चुका है। इसके बावजूद मंदिर का बड़ा हिस्सा अब भी आम श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह सुलभ नहीं हो सका है। उन्होंने मांग की कि मंदिर को पुरातत्व विभाग के नियंत्रण से मुक्त कर धार्मिक परंपराओं के अनुरूप व्यवस्था बहाल की जाए।
मां नर्मदा मंदिर के सामने स्थित इस प्राचीन मंदिर में पूजा-अर्चना के अधिकार को लेकर पूर्व में ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की ओर से न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ी गई थी। इस प्रकरण में अधिवक्ता मुरलीधर शर्मा और श्रीधर शर्मा ने पक्ष रखा था। न्यायालय ने अपने निर्णय में द्वारका शारदा पीठ को मंदिर की देखरेख और विधि-विधान से पूजा-अर्चना का अधिकार प्रदान किया था।
स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि न्यायालय के आदेश की भावना के अनुरूप व्यवस्था अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है। उनका आरोप है कि इसी कारण धार्मिक आस्था से जुड़े लोगों में निराशा बनी हुई है और नियमित पूजा-अर्चना की उम्मीद अब भी अधूरी है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पातालेश्वर महादेव का विशेष महत्व है और विशेषकर श्रावण मास में यहां धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा रही है। श्रद्धालुओं का कहना है कि वर्षों से पूजा व्यवस्था प्रभावित रहने से आस्था रखने वाले लोगों में असंतोष है।
वर्तमान में मंदिर परिसर में बद्री विशाल भगवान की पूजा एक साध्वी द्वारा किए जाने की जानकारी है, जबकि पातालेश्वर महादेव, भगवान विष्णु और हनुमान मंदिर सहित अन्य प्राचीन देवस्थानों में नियमित पूजा शुरू कराने की मांग लगातार उठ रही है।
भगवा पार्टी ने राज्य और जिला प्रशासन से न्यायालय के आदेश की समीक्षा कर उसके प्रभावी पालन की दिशा में आवश्यक कदम उठाने की मांग की है, ताकि श्रद्धालुओं को धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना का अवसर मिल सके।














