भोपाल, 06 अगस्त।
मध्य प्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने इंदौर स्थित 132 केवी चंबल सब स्टेशन में बड़ा तकनीकी उन्नयन पूरा कर लिया है। करीब 60 वर्ष पुराने इस सब स्टेशन पर 33 केवी के सभी फीडरों की आपसी क्रॉसिंग समाप्त कर उन्हें अंडरग्राउंड केबल प्रणाली से जोड़ दिया गया है। कंपनी का कहना है कि इस बदलाव से बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता, सुरक्षा और संचालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
एमपी ट्रांसको के अनुसार, इंदौर का यह सबसे पुराना और मालवा क्षेत्र का दूसरा सबसे पुराना अति उच्चदाब (ईएचवी) सब स्टेशन है। पिछले छह दशकों में बढ़ती बिजली मांग के कारण यहां 33 केवी फीडरों की संख्या बढ़कर 16 हो गई थी। समय के साथ इन फीडरों की आपसी क्रॉसिंग संचालन और रखरखाव के लिए बड़ी तकनीकी चुनौती बन गई थी।
कंपनी के मुताबिक, फीडरों की क्रॉसिंग वाले स्थानों पर कंडक्टर टूटने और अन्य तकनीकी कारणों से कई बार ट्रिपिंग और बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति बन जाती थी। अब सभी 16 फीडरों को भूमिगत केबल प्रणाली से जोड़ दिए जाने के बाद ऐसी तकनीकी समस्याओं की संभावना काफी कम हो जाएगी। इससे सब स्टेशन की परिचालन सुरक्षा मजबूत होगी और रखरखाव का कार्य भी अधिक सुगमता से किया जा सकेगा।
इस परियोजना पर आने वाला खर्च मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड ने वहन किया है। एमपी ट्रांसको और पश्चिम डिस्कॉम के समन्वित प्रयासों से निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजना पूरी की गई।
परियोजना के तहत सभी 16 फीडरों के लिए आधुनिक डक्ट सिस्टम विकसित कर उन्हें भूमिगत केबल के माध्यम से संबंधित ग्रिडों से जोड़ा गया है। इस तकनीकी उन्नयन का लाभ इंदौर के एमजी रोड, सरवटे, रेलवे स्टेशन, उज्जैन रोड, किला मैदान, एयरपोर्ट रोड, जवाहर मार्ग, राज मोहल्ला, भागीरथपुरा, सांवेर रोड तथा आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेगा। कंपनी का कहना है कि इससे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ औद्योगिक क्षेत्रों को भी अधिक सुरक्षित, स्थिर और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।















