भोपाल, 06 अगस्त।
हमीदिया अस्पताल की एक डॉक्टर से ऑनलाइन गेमिंग लिंक के जरिए हुई साइबर ठगी की जांच में पुलिस ने बड़े बैंक खाता नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि भोपाल से ग्रामीणों के नाम पर बड़ी संख्या में बैंक खाते खुलवाकर उन्हें देशभर में सक्रिय साइबर ठगों को इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया जाता था। इन्हीं खातों के माध्यम से ठगी की रकम का लेनदेन और निकासी की जाती थी।
मामले में कोहेफिजा थाना पुलिस ने राजगढ़ जिले के ब्यावरा निवासी करतार सिंह को गिरफ्तार किया है। वह वर्तमान में भोपाल के इंद्रपुरी क्षेत्र में रह रहा था। पुलिस के अनुसार, वह यहीं से पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। पूछताछ में यह भी सामने आया कि उसके संपर्क राजस्थान में सक्रिय साइबर अपराधियों से थे और वह उनके लिए कथित म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराता था।
पुलिस जांच के मुताबिक, साइबर ठगी से हासिल रकम सबसे पहले इन बैंक खातों में जमा की जाती थी। प्रत्येक लेनदेन पर गिरोह छह प्रतिशत कमीशन लेता था। इसमें तीन प्रतिशत रकम खाताधारकों और स्थानीय नेटवर्क को दी जाती थी, जबकि शेष तीन प्रतिशत मुख्य एजेंट अपने पास रखता था।
जांच में यह भी पता चला कि राजस्थान में बैठे साइबर ठग ठगी की रकम भोपाल स्थित इन खातों में भेजते थे। इसके बाद गिरोह के एजेंट महेश बिश्नोई और विकास पुनिया भोपाल पहुंचकर खाताधारकों से नकदी निकलवाते और रकम एकत्र कर राजस्थान ले जाते थे। कुछ राशि कैश डिपॉजिट मशीन के जरिए भी गिरोह के सरगनाओं तक पहुंचाई जाती थी।
पुलिस इससे पहले महेश बिश्नोई और विकास पुनिया को गिरफ्तार कर चुकी है। दोनों से पूछताछ के आधार पर ही करतार सिंह तक पहुंचने में सफलता मिली। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के बाद उसके कब्जे से 10 बैंक खातों की पासबुक और एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में इन्हें पूरे नेटवर्क का केवल एक हिस्सा माना जा रहा है।
पुलिस को आशंका है कि भोपाल और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के नाम पर बड़ी संख्या में बैंक खाते खुलवाकर उनका उपयोग साइबर ठगी में किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि कई ग्रामीणों को खाते खुलवाने के बदले मामूली रकम का लालच दिया जाता था।
फिलहाल तीनों आरोपितों को रिमांड पर लेकर पुलिस उनके मोबाइल फोन, बैंक लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड और संपर्कों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं, कितने बैंक खातों का इस्तेमाल हुआ और ठगी की रकम किन-किन खातों के जरिए भेजी गई। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस अंतरराज्यीय साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।















