जोधपुर, 06 अगस्त।
आरएएस अधिकारी प्रियंका विश्नोई की मौत से जुड़े मामले में वसुंधरा अस्पताल के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई है। अदालत के निर्देश पर चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाना पुलिस ने अस्पताल के संचालकों और चिकित्सकों के विरुद्ध धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और जांच एजेंसियों को कथित रूप से गुमराह करने के आरोपों में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, जोधपुर महानगर के अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-08 के आदेश पर यह कार्रवाई की गई। मामले में अस्पताल के संचालक डॉ. संजय मकवाना, डॉ. रेणू मकवाना, डॉ. विनोद शैली और डॉ. जितेंद्र खेतावत को नामजद किया गया है।
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि चिकित्सा लापरवाही को छिपाने के उद्देश्य से मेडिकल रिकॉर्ड में बाद में बैकडेट एंट्री की गई। शिकायत के मुताबिक, सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर दावा किया गया है कि मरीज का सीबीसी ब्लड सैंपल और लैब रिपोर्ट के समय तथा ऑपरेशन से जुड़े रिकॉर्ड में विसंगतियां हैं। आरोप है कि जांच एजेंसियों और न्यायालय को गुमराह करने के लिए कथित रूप से फर्जी लैब रिपोर्ट और रिकॉर्ड तैयार किए गए।
मामले के अनुसार, प्रियंका विश्नोई को 5 सितंबर 2024 को वसुंधरा अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां उनकी सर्जरी हुई। इसके बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अहमदाबाद रेफर किया गया, जहां 18 सितंबर 2024 को उनका निधन हो गया था। वह वर्ष 2016 बैच की राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) की अधिकारी थीं।
चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाना पुलिस ने बताया कि अदालत के आदेश पर मामला दर्ज कर जांच उप निरीक्षक को सौंपी गई है। पुलिस लैब रिकॉर्ड, स्याही और डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच करा रही है। पुलिस के अनुसार, पहले मेडिकल कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज मामला निरस्त हो गया था, लेकिन अब इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड (ईएमआर) ऑडिट और फॉरेंसिक जांच की मांग के साथ नए आरोपों की जांच की जा रही है।















