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मध्य प्रदेश
06 Aug, 2026

कम बारिश से विंध्य में धान की खेती प्रभावित, दलहन-तिलहन की ओर बढ़े किसान

विंध्य क्षेत्र में सामान्य से कम बारिश के कारण धान की बुआई प्रभावित हुई है, जबकि किसानों का रुझान अब कम पानी में तैयार होने वाली दलहन और तिलहन फसलों की ओर बढ़ रहा है।

रीवा, 06 अगस्त।

मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में जून और जुलाई के दौरान सामान्य से कम हुई बारिश का असर खरीफ सीजन की खेती पर दिखाई देने लगा है। अल्प वर्षा के कारण रीवा संभाग के छह जिलों में प्रमुख खरीफ फसल धान की बुआई प्रभावित हुई है। कृषि विभाग को इस वर्ष धान के रकबे में औसतन करीब 10 प्रतिशत तक कमी आने की आशंका है।

रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मैहर और मऊगंज जिलों में धान की बुआई 80 प्रतिशत के स्तर तक भी नहीं पहुंच सकी है। वहीं, मौसम की स्थिति को देखते हुए किसानों ने कम पानी में तैयार होने वाली दलहन और तिलहन फसलों की ओर रुख किया है। इसके चलते तिल, उड़द, मूंग और अरहर जैसी फसलों का रकबा करीब 15 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

कृषि विज्ञान केंद्र, मझगवां के पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश जांगड़े ने बताया कि अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए जून में ही किसानों को कम पानी वाली फसलें अपनाने की सलाह दी गई थी। उन्होंने कहा कि कई किसानों ने इस पर अमल किया, जिससे दलहन और तिलहन की खेती का दायरा बढ़ा है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, विंध्य क्षेत्र की 70 से 80 प्रतिशत खरीफ खेती वर्षा पर निर्भर है। ऐसे में बारिश का असमान वितरण और सामान्य से कम वर्षा सीधे फसल उत्पादन को प्रभावित करती है। उनका कहना है कि खरीफ फसलों की बेहतर बुआई के लिए 25 जून से 31 जुलाई का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है और इस अवधि में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से धान की खेती प्रभावित हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अब धान की बुआई में आई कमी की भरपाई करना आसान नहीं होगा। वर्ष 2023 के बाद यह दूसरा अवसर है, जब विंध्य क्षेत्र में कम वर्षा की स्थिति बनी है। प्रदेश में मानसून का आधिकारिक सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक रहता है और इसी दौरान खरीफ फसलों की अधिकांश बुआई पूरी होती है।

उप संचालक कृषि आशीष पांडे ने बताया कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं है, वहां किसानों को धान की जगह कम पानी में तैयार होने वाली फसलों के प्रमाणित और उपचारित बीजों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। उनके अनुसार, बदलते मौसम के अनुरूप फसल चयन किसानों के लिए अधिक लाभदायक साबित हो सकता है।

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