न्यूयॉर्क, 24 सितंबर।
नेपाल के विदेशमंत्री शिशिर खनाल ने जलवायु से जुड़ी आपदाओं से प्रभावित नेपाल के पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत बताई है। उन्होंने जी-7 देशों से पीड़ितों के पुनर्वास, जलवायु वित्त, आपदा पूर्व तैयारी, बहुपक्षीय वित्तीय सहयोग और हिमालय से जुड़े विषयों पर साझेदारी बढ़ाने का आग्रह किया।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के अवसर पर हुई जी-7 विकास मंत्रीस्तरीय बैठक में खनाल ने नेपाल में हाल की जलवायुजनित आपदा से हुए नुकसान की जानकारी दी। उन्होंने कठिन समय में नेपाल के साथ एकजुटता और सहयोग के लिए जी-7 देशों तथा अन्य मित्र राष्ट्रों के प्रति सरकार और नेपाली जनता की ओर से आभार जताया।
खनाल ने जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, लचीलापन और आपदा जोखिम कम करने के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने में जी-7 के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने बैठक के आयोजन के लिए जी-7 की अध्यक्षता कर रहे फ्रांस को भी धन्यवाद दिया।
उन्होंने बताया कि हाल की आपदा से नेपाल में बड़े पैमाने पर मानवीय और भौतिक नुकसान हुआ है। बाढ़ ने घरों, सड़कों, पुलों, स्कूलों, स्वास्थ्य संस्थानों और जलविद्युत ढांचे को प्रभावित किया है। इसके कारण लोगों का सामान्य जीवन और जरूरी सेवाएं भी बाधित हुई हैं।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए नेपाल को पांच अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की आवश्यकता होगी। खनाल ने बताया कि आपदा के वैज्ञानिक अध्ययन का काम जारी है। शुरुआती जानकारी में तेजी से गर्म हो रहे हिमालयी वातावरण में बर्फ, चट्टान, पानी और अस्थिर भू-आकृतियों के बीच जटिल अंतःक्रिया को आपदा का संभावित कारण बताया गया है।
सरकार ने जलवायु परिवर्तन के साथ भूगर्भीय, हिमनदीय और जलविज्ञान संबंधी कारणों का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की है। खनाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन नेपाल के लिए भविष्य का खतरा नहीं रह गया है, बल्कि यह वर्तमान की वास्तविकता बन चुका है।
उन्होंने कहा कि इसके प्रभाव की तीव्रता और घटनाओं की आवृत्ति दोनों बढ़ रही हैं। इससे जनधन और आजीविका को नुकसान पहुंचने के साथ लंबे समय में हासिल विकास की उपलब्धियां भी प्रभावित हो रही हैं। हिमालय, नदियां, समुदाय और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे बाढ़, भूस्खलन, हिमनदीय जोखिम तथा अन्य जलवायुजनित आपदाओं के खतरे का सामना कर रहे हैं।
खनाल ने कहा कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नेपाल की हिस्सेदारी बेहद कम है, फिर भी देश को जलवायु परिवर्तन के असमान प्रभाव झेलने पड़ रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नेपाल के लिए सहयोग बढ़ाने की अपील की।
पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए नेपाल ने पांच प्रमुख अपेक्षाएं रखीं। पहली अपेक्षा दीर्घकालीन पुनर्वास के लिए साझेदारी की है। खनाल ने मानवीय सहायता में मिले सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि लंबे समय के पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए अनुदान तथा रियायती वित्तीय संसाधनों के साथ समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयास जरूरी हैं।
दूसरी प्राथमिकता जलवायु वित्त तक आसान पहुंच की है। उन्होंने अनुकूलन तथा जलवायु परिवर्तन से होने वाली हानि और क्षति के लिए विकासशील एवं जलवायु जोखिम वाले देशों को तेज और सरल तरीके से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।
खनाल ने बताया कि नेपाल ने हानि और क्षति कोष से जुड़ी वित्तीय व्यवस्था के लिए अनुरोध किया है और सकारात्मक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है। उन्होंने आपदा रोकथाम और पूर्व तैयारी में निवेश बढ़ाने की भी जरूरत बताई।
उन्होंने पूर्व चेतावनी प्रणाली, जलवायु संबंधी जानकारी, जल एवं मौसम सेवाओं, जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे और समुदाय आधारित आपदा तैयारी कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। जी-7 और अन्य साझेदार देशों से इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की अपील की गई।
खनाल ने बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों के जरिए तेज, कम लागत वाली और आसानी से उपलब्ध वित्तीय व्यवस्था की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि समय पर मिलने वाले वित्तीय संसाधन जलवायुजनित झटकों से बार-बार प्रभावित होने वाले जोखिमग्रस्त देशों के लिए जीवनरेखा हैं।
उन्होंने जी-7 देशों से बहुपक्षीय विकास बैंकों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर आवश्यक संसाधन जुटाने में अपने प्रभाव और समन्वय क्षमता का उपयोग करने का आग्रह किया।
नेपाल ने हिमालयी क्षेत्र को वैश्विक जलवायु एजेंडे में अधिक प्राथमिकता देने की मांग भी रखी। खनाल ने कहा कि हिमनदों, हिमालय और जल प्रणालियों का भविष्य क्षेत्रीय तथा वैश्विक जलवायु सुरक्षा से सीधे जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि हिमालय में होने वाला बदलाव केवल इसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसका असर दक्षिण एशिया और उससे आगे मानसून, नदी तटीय क्षेत्रों, कृषि प्रणालियों और लाखों लोगों के जीवन पर पड़ता है। उन्होंने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और साझा जलवायु लचीलेपन के लिए जी-7 के साथ सहयोग की नेपाल की तत्परता जताई।
खनाल ने भोटेकोशी आपदा को केवल नेपाल तक सीमित त्रासदी के रूप में देखने के बजाय हिमालय की ओर से दुनिया के लिए गंभीर संदेश बताया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को ठोस कार्रवाई, जोखिम को लचीलेपन और साझा जिम्मेदारी को जलवायु न्याय में बदलने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि नेपाल सुरक्षित, लचीली और टिकाऊ दुनिया के निर्माण के लिए जी-7 सहित सभी अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ सहयोग करने को तैयार है।
















