नई दिल्ली, 29 सितंबर।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय में मंगलवार को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रभारियों व सह-प्रभारियों की बैठक हुई। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में हुई यह बैठक हालिया संगठनात्मक नियुक्तियों के बाद इन पदाधिकारियों की पहली सामूहिक बैठक है।
बैठक में संगठन के विस्तार, राज्यों में गतिविधियों की समीक्षा और आने वाले महीनों की कार्ययोजना पर चर्चा की जा रही है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए संगठन की तैयारियों और जमीनी स्तर की गतिविधियों की भी समीक्षा बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल है।
बैठक में 28 राज्यों और आठ केंद्रशासित प्रदेशों के लिए हाल में नियुक्त प्रभारी और सह-प्रभारी शामिल हुए। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिवों और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
चुनावी राज्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश समेत संबंधित राज्यों में संगठन की स्थिति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और बूथ स्तर तक की तैयारियों की जानकारी ली जा रही है। प्रभारियों से अपने-अपने राज्यों की संगठनात्मक स्थिति पर चर्चा कर आगे की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
उत्तर प्रदेश के लिए विनोद तावड़े को प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ मेधा कुलकर्णी, जगदीश पटेल, प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हो रही है।
इससे पहले नए प्रभारियों की बैठक सोमवार शाम विनोद तावड़े के आवास पर हुई थी। उत्तर प्रदेश को लेकर 3 और 4 अक्टूबर को मथुरा में दो दिवसीय संगठनात्मक बैठक प्रस्तावित है, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
बैठक में पार्टी कार्यकर्ताओं से नियमित संपर्क, संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने और स्थानीय स्तर पर कार्यक्रमों के संचालन से जुड़े विषयों पर भी विचार किया जा रहा है। भाजपा शासित राज्यों में सरकार और संगठन के बीच समन्वय तथा केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने में संगठन की भूमिका की समीक्षा भी चर्चा का हिस्सा है।
23 सितंबर को भाजपा ने 28 राज्यों और आठ केंद्रशासित प्रदेशों के लिए प्रभारी और सह-प्रभारियों की नियुक्तियां की थीं। इसके बाद हो रही बैठक में नए पदाधिकारियों को अपने-अपने राज्यों की जिम्मेदारियों और आगामी कार्यक्रमों को लेकर केंद्रीय नेतृत्व के साथ समन्वय का अवसर मिल रहा है।














