नई दिल्ली, 29 सितंबर।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क स्थित एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कहा कि चीन के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंध पिछले वर्ष की तुलना में अब काफी बेहतर स्थिति में हैं, जो सीमा पर उपजे गतिरोध के समाधान के बाद पटरी पर लौटे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि आपसी संबंधों में गिरावट या लंबे समय तक तनाव का माहौल दोनों में से किसी भी देश के हित में नहीं है। इसके अलावा, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि दोनों देश अब आपसी समझ के एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुके हैं जहां ट्रेड डील को लेकर सहमति बन रही है। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषता बताते हुए कहा कि भारत मुख्य रूप से छोटे कृषि उत्पादकों और लघु उद्योगों का देश है, जहां उत्पादन की संरचना अमेरिका से पूरी तरह भिन्न है और इसी वजह से जटिल व्यापार वार्ताओं में धैर्य तथा सूक्ष्म विवरणों की आवश्यकता होती है।
वैश्विक चुनौतियों पर बात करते हुए विदेश मंत्री ने आतंकवाद के मुद्दे पर अमेरिकी रुख का जिक्र करते हुए कहा कि इस संवेदनशील विषय पर अमेरिकी पक्ष से अपेक्षित संवेदनशीलता और गहरी समझ देखने को नहीं मिलती है। उन्होंने रूस-यूक्रेन तथा ईरान-खाड़ी संघर्षों के कारण ग्लोबल साउथ की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़े विनाशकारी प्रभावों पर गहरी चिंता जताई, साथ ही ऊर्जा बाजार की तंग स्थिति और वैश्विक खाद्य एवं उर्वरक संकट की संभावनाओं को लेकर भी आगाह किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ऐसे नाजुक समय में ऊर्जा बाजार को लेकर राजनीतिक बयानबाजी करने से जटिलताएं बढ़ती हैं और कीमतें आसमान छूने लगती हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर इस वक्त कीमतों को स्थिर बनाए रखने की सख्त जरूरत है।














