नई दिल्ली, 29 सितंबर।
उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) के चुनावों को लेकर एक अहम अंतरिम आदेश पारित करते हुए मतदान प्रक्रिया पर तो रोक नहीं लगाई है, किंतु परिणामों की घोषणा पर अगले आदेश तक प्रतिबंध लगा दिया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के नेतृत्व वाली पीठ ने पूर्व महिला क्रिकेटर मेघा गौर द्वारा दाखिल की गई उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया, जिसमें यह गंभीर आरोप लगाया गया था कि पूरी चुनावी प्रक्रिया से महिलाओं को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है। याचिकाकर्ता की पैरवी कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अदालत के समक्ष यह पक्ष रखा कि आरसीए के नियमों और कोआपरेटिव सोसायटी के रजिस्ट्रार के निर्देशों को ताक पर रखकर कराए जा रहे इन चुनावों में न तो कोई महिला मतदाता है और न ही एक भी महिला उम्मीदवार को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने टिप्पणियां करते हुए कहा कि हालांकि चुनावों को ऐन वक्त पर रोकना उचित नहीं होगा, लेकिन यदि नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोप हैं, तो परिणामों पर रोक लगाई जा सकती है। इस बीच आरसीए की तरफ से पेश हुए वकील ने अदालत को अवगत कराया कि उच्च न्यायालय ने राज्य के गृह सचिव को पहले ही आरसीए का प्रशासक नियुक्त कर रखा है और महिलाओं के प्रतिनिधित्व से जुड़ा यह विषय फिलहाल उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने मतदान संपन्न कराने की अनुमति तो दी, लेकिन परिणामों के ऐलान पर रोक लगाते हुए उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह महिलाओं के अधिकारों से जुड़े इस मामले की जल्द सुनवाई कर इस पर अपना फैसला सुनाए।














