नई दिल्ली, 28 सितंबर।
सुप्रीम कोर्ट ने ठाणे जिले के डोंबिवली स्थित शास्त्री नगर नगर निगम अस्पताल में डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों पर कथित हमले के मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की जमानत रद्द कर दी है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। अदालत ने म्हात्रे को तीन दिनों के भीतर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों पर इस तरह का हमला स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह मामला छह जुलाई को अस्पताल में हुई कथित मारपीट से जुड़ा है। एक गर्भवती महिला के परिजनों ने इलाज में देरी का आरोप लगाया था, जिसके बाद म्हात्रे और अन्य लोग अस्पताल पहुंचे थे। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सात अगस्त को म्हात्रे और तीन अन्य आरोपितों को शर्तों के साथ जमानत दी थी तथा मुकदमे को फास्ट ट्रैक करने के निर्देश दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट में म्हात्रे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि मामले में सुनवाई शुरू हो चुकी है और दो गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि महिला डॉक्टर की गवाही तीन अक्टूबर को होनी है। बचाव पक्ष ने म्हात्रे के खिलाफ दर्ज 19 आपराधिक मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें से 18 मामलों में वह बरी हो चुके हैं और कुछ मामले राजनीतिक कारणों से दर्ज किए गए थे। महाराष्ट्र सरकार की ओर से इन मामलों को आधार बनाते हुए जमानत रद्द करने की मांग की गई। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत आदेश को निरस्त करते हुए म्हात्रे को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। अदालत ने डॉक्टरों पर हमले के मामलों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।














