नई दिल्ली, 29 सितंबर।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना के द्विवार्षिक कमांडर्स सम्मेलन में कहा कि भारतीय युद्धपोतों की मौजूदगी दक्षिण चीन सागर, भूमध्य सागर और अटलांटिक महासागर तक है। उन्होंने कहा कि यह तैनाती समुद्री क्षेत्र में भारत की सैन्य क्षमता और रणनीतिक पहुंच को दर्शाती है। नौसेना भवन में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति लगातार मजबूत हुई है। समुद्री सुरक्षा को देश की सुरक्षा से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षित समुद्री क्षेत्र भारत की आर्थिक और विकास संबंधी प्राथमिकताओं के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने नौसेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार और युद्धक क्षमता से लैस बल के रूप में निरंतर विकसित करने पर जोर दिया। पश्चिम एशिया में संकट के दौरान नौसेना की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों, विशेषकर एलपीजी टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के प्रयासों की सराहना की।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अपने कच्चे तेल का करीब 85 से 90 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस का लगभग 50 प्रतिशत समुद्री मार्गों से आयात करता है, इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ी है। उन्होंने नौसेना के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण तंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि हाल में शामिल किए गए युद्धपोतों में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। उन्होंने भविष्य में मित्र देशों को युद्धपोत निर्यात करने की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत बताई। बढ़ते समुद्री यातायात को देखते हुए निगरानी व्यवस्था में उन्नत विश्लेषण क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया। राजनाथ सिंह ने अग्रिम मोर्चे के युद्धपोतों और विमानों पर महिला अधिकारियों की तैनाती तथा नौसैनिक अभियानों में उनकी भागीदारी की सराहना की। उन्होंने लोकयान-26 के लिए आईएनएस सुदर्शनी की तैनाती को भी समुद्री कूटनीति और भारतीय समुद्री विरासत के प्रदर्शन से जोड़ा। सम्मेलन के दौरान उन्होंने सीडीएस और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के साथ भी चर्चा की तथा बदलती चुनौतियों के बीच नौसेना से उच्च स्तर की युद्ध तत्परता बनाए रखने का आह्वान किया।














