नई दिल्ली, 29 सितंबर।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौसम की प्रतिकूलता या प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में केंद्र सरकार किसानों के साथ खड़ी है। नई दिल्ली के पूसा में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 के दौरान उन्होंने रबी सीजन के लिए पर्याप्त खाद, प्रमाणित बीज और जरूरी वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता का भरोसा दिलाया। उन्होंने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के लिए किसानों को एकतरफा जिम्मेदार ठहराने पर भी आपत्ति जताई। चौहान के अनुसार रबी सीजन की तैयारियों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच लगातार समन्वय किया गया है। सम्मेलन में राज्यों के कृषि मंत्रियों और अधिकारियों ने अपने-अपने राज्यों की प्राथमिकताएं और आवश्यकताएं साझा कीं। उन्होंने बताया कि 2015 के बाद खाद्यान्न उत्पादन की औसत वार्षिक वृद्धि दर बढ़कर 8.4 मिलियन टन हुई है, जबकि 1967 से 1995 के दौरान यह 4.1 मिलियन टन और 1996 से 2014 के बीच 3.9 मिलियन टन रही थी। कृषि की औसत विकास दर भी 2015 के बाद करीब 4.5 प्रतिशत बताई गई, जो इससे पहले लगभग 3 प्रतिशत के आसपास थी। मानसून की असमानता और अल-नीनो की आशंका के बीच उन्होंने कहा कि केंद्र ने पहले से तैयारी की थी और कम बारिश के बावजूद खरीफ बुवाई के कुल रकबे में लगभग एक प्रतिशत की ही कमी आई।
चौहान ने बताया कि धान के रकबे में करीब 16.32 लाख हेक्टेयर की कमी आई है, जबकि उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और तुअर के क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भारी बारिश, बाढ़ या सूखे से करीब 6.11 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित होने की प्रारंभिक जानकारी मिली है और नुकसान का वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद देश में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित है। रबी 2026-27 के लिए राज्यों ने कुल 380 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की मांग बताई है और देश में 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक का भंडार मौजूद है। किसानों की लागत घटाने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए संतुलित खाद उपयोग पर भी जोर दिया गया। सम्मेलन में ‘खेत बचाओ अभियान’ को रबी सीजन में भी चलाने की बात कही गई। केंद्र की ओर से जारी जानकारी के अनुसार 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा।














