नई दिल्ली, 29 सितंबर।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार गांव-गांव जाकर किसानों को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के संभावित लाभों की जानकारी देगी। उन्होंने कहा कि एफटीए के बाद भारतीय किसानों को कई देशों में अपने उत्पाद शून्य शुल्क पर बेचने का अवसर मिल सकता है, हालांकि इसके लिए संबंधित देशों के गुणवत्ता मानकों को पूरा करना होगा। उन्होंने बताया कि 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक चलने वाले ‘खेत बचाओ अभियान’ के दौरान किसानों के बीच एफटीए को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। पूसा में राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 के दौरान उन्होंने कहा कि किसानों को मिट्टी की जरूरत के अनुसार यूरिया और डीएपी के संतुलित इस्तेमाल की जानकारी भी दी जाएगी। खरीफ सीजन में कुछ राज्यों के दो-दो जिलों में किए गए पायलट प्रोजेक्ट में संतुलित उर्वरक उपयोग से खपत 27 प्रतिशत कम हुई और करीब 1,400 करोड़ रुपये की बचत हुई। अब इसी मॉडल को बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी है। अभियान में आईसीएआर वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ, आत्मा की टीमें और कृषि विभाग के अधिकारी किसानों तक पहुंचेंगे।
चौहान ने बताया कि अभियान के दौरान फसल चयन, मिट्टी, पानी, बीज और किसान क्रेडिट कार्ड सहित विभिन्न विषयों पर भी जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि रबी अभियान की तैयारी के लिए केंद्र और राज्यों के बीच लगातार समन्वय किया गया है। उनके अनुसार, कृषि क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर 2015 के बाद करीब 4.5 प्रतिशत रही है, जबकि इससे पहले के लंबे दौर में यह लगभग 3 प्रतिशत के आसपास थी। उन्होंने मानसून की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि शुरुआती समय में वर्षा की कमी 14 प्रतिशत थी, जो हाल की बारिश के बाद घटकर 12 प्रतिशत रह गई है। खरीफ फसलों के कुल बुवाई क्षेत्र में करीब एक प्रतिशत की कमी आई है। धान, मक्का, सोयाबीन और कपास के रकबे में गिरावट के साथ उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और तुअर के क्षेत्र में वृद्धि दर्ज की गई। मंत्री ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं से कुछ राज्यों में करीब 6.11 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित होने की प्रारंभिक सूचना है। उन्होंने कहा कि देश में 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक का भंडार उपलब्ध है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह करीब 122 लाख मीट्रिक टन था। रबी 2026-27 के लिए राज्यों ने कुल 380 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की मांग रखी है और सरकार ने उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कही है।














